बरेली जिले में मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी 2015 को फतेहगंज पश्चिमी कस्बे में पुलिस चौकी के पीछे मंदिर परिसर में पशुओं के अवशेष मिलने के बाद प्रदर्शन करने वाले भाजपाइयों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उस समय दूसरे समुदाय के विरोध में भाजपाइयों ने प्रदर्शन किया था। इससे कस्बे का माहौल गरमा गया था। पुलिस ने 60 से ज्यादा भाजपाइयों को बलवा, दंगा भड़काने की कोशिश आदि धाराओं में नामजद किया था। वर्ष 1998 में भी बिजली कटौती के विरोध में हाईवे पर जाम लगाने के मामले में कई भाजपाई नामजद हैं। दोनों मामले में कोर्ट ने वारंट जारी किया है।

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद इन मुकदमों को वापस लेने की कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन मजबूत पैरवी न होने के कारण अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या तीन ने आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। इसके बाद कई आरोपी भूमिगत हो गए हैं। कस्बा निवासी आशीष अग्रवाल ने बताया कि झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, सांसद छत्रपाल गंगवार, राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार, विधायक डीसी वर्मा ने मुकदमा वापसी के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। मुख्यमंत्री व राज्यपाल ने अपराध संख्या 11,12/ 2015 और अपराध संख्या 176/1998 को वापस लेने की संस्तुति भी कर दी है।

विशेष सचिव मुकेश कुमार सिंह ने 15 मार्च 2024 को डीएम बरेली को उक्त मुकदमों को वापस कराने का निर्देश पत्र जारी किया था। कस्बे के भाजपाइयों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासन और पार्टी नेताओं की ओर से सही ढंग से पैरवी न किए जाने के कारण कोर्ट से वारंट जारी हुए हैं। आशीष अग्रवाल ने दोबारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।



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