बरेली के सूफी टोला स्थित ऐवान-ए-फरहत और गुड मैरिज हॉल के ध्वस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद इस पूरे मामले की परतें भी खुल रही हैं। ध्वस्तीकरण आदेश के बाद वर्ष 2018 में बरातघर संचालकों ने इस अवैध निर्माण का नक्शा पास कराने के लिए दो लाख रुपये शमन शुल्क भी बरेली विकास प्राधिकरण में जमा कराया था। हालांकि इसके बाद फाइल दब गई थी।

पूर्व मंत्री आजम खान के करीबी सपा नेता सरफराज वली खां और राशिद खां के दो बरातघरों पर जिस 2011 के आदेश का हवाला देकर बुलडोजर चलाया गया, संचालकों ने उस पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें 2011 में ध्वस्तीकरण का आदेश पारित होने की जानकारी ही नहीं दी गई थी। हालांकि, बीडीए के उपाध्यक्ष ने कार्रवाई नियमानुसार ही होने की बात कही है।




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SP leaders raised questions over the BDA demolition of wedding halls in Bareilly

1942 की ईंट दिखाते सपा नेता सरफराज
– फोटो : अमर उजाला


संचालकों ने जाम किए थे दो-दो लाख रुपये 

बरातघर संचालक सरफराज वली खान और राशिद खान का कहना है कि उन्हें 12 अक्तूबर 2011 को पारित किसी भी ध्वस्तीकरण आदेश की जानकारी कभी नहीं दी गई। संचालकों का आरोप है कि 2018 में बीडीए की ओर से कंपाउंडिंग के लिए रुपये जमा कराने को कहा गया था, जिसके तहत दोनों ने दो-दो लाख रुपये जमा भी किए। 


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सरफराज और राशिद के बरातघरों पर हुई थी कार्रवाई
– फोटो : अमर उजाला


उनके अनुसार, इसके बाद किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई गई और गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहीं। लेकिन बीते शनिवार रात अचानक नोटिस देकर इमारत खाली करने के लिए कहा गया और मंगलवार सुबह ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। संचालकों का कहना है कि देश की आजादी से पहले बनी इस इमारत पर कार्रवाई जल्दबाजी और मनमाने ढंग से की गई है।


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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई ध्वस्तीकरण पर रोक
– फोटो : अमर उजाला


बीडीए उपाध्यक्ष बोले- नोटिस भेजे गए थे 

दूसरी ओर, बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए के अनुसार, वर्ष 2011 में ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने से पहले प्राधिकरण की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया था और उसके बाद नोटिस भी भेजे गए थे। बीडीए का दावा है कि नोटिसों पर कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही अदालत में सुनवाई के दौरान संचालक पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर पाए, जिसके बाद ध्वस्तीकरण का आदेश पारित हुआ और इसकी जानकारी संबंधित पक्षों को दी गई थी। 


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दो दिन बाद रुकी थी कार्रवाई
– फोटो : अमर उजाला


उन्होंने बताया कि 2018 में दाखिल की गई कंपाउंडिंग की फाइलें शर्तें पूरी न होने के कारण निरस्त कर दी गईं। प्राधिकरण का कहना है कि आवासीय भवन में बरातघर का संचालन, 12 मीटर से कम चौड़ी सड़क और वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने जैसी कई शिकायतें भी उनके पास दर्ज थीं, जिन्हें कार्रवाई के आधार में शामिल किया गया है।




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