UP will be the hub of green energy in next five years.

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : पिक्साबे

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उत्तर प्रदेश अगले पांच साल में हरित ऊर्जा का हब बनेगा। यहां गुजरात, राजस्थान सहित अन्य राज्यों की तरह हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा। इस क्षेत्र में करीब 4,47,310 करोड़ रुपये का निवेश के लिए एमओयू हुआ है। वहीं, उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022 के क्रियान्वयन के लिए 317 करोड़ रुपये बजट में मिला है।

प्रदेश में सोलर रूफ टॉप योजना के तहत छह हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। इस योजना में सोलर पैनल लगवाने पर प्रति किलोवाट करीब 55 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है और 45 हजार की सब्सिडी मिलती है। इसी तरह सोलर पावर प्लांट के तहत मिर्जापुर के अलावा बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों में करीब दो हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसे पांच साल में बढ़ाकर 14 हजार मेगावाट किया जाना है। मिर्जापुर, प्रयागराज सहित अन्य जिलों में अल्ट्रा मेगा प्लांट लगाए जा रहे हैं। रिहंद के अलावा महोबा, हमीरपुर, झांसी के जलाशयों के पास सोलर पावर पार्क विकसित किए जाएंगे। पीएम कुसुम योजना के तहत निजी ऑनग्रिड पंप का सोलराइजेशन किया जा रहा है।

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जैव ऊर्जा नीति का मिलेगा फायदा

उप्र राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के तहत कृषि अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट, चीनी मिलों से प्रेसमड, नगर पालिका के ठोस अपशिष्ट आदि से कंप्रेस्ड बायो गैस, बायो कोल व बायो डीजल बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए 45 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

प्रशिक्षण तैयार किए जा रहे सौर मित्र

आईआईटी और पॉलीटेक्निक डिग्रीधारियों को 90 दिन का प्रशिक्षण देकर सौर मित्र बनाया जा रहा है। ये विभिन्न सौर प्लांट की निगरानी के काम लगाए जा रहे हैं। लखनऊ के चिनहट और मऊ के बाद अब अन्य मंडल मुख्यालयों पर भी प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी है।

दो चरणों में बनेगा हरित ऊर्जा कॉरिडोर

प्रदेश में दो चरणों में हरित ऊर्जा कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं। पहले चरण में वर्ष 2024-25 तक ट्रांसमिशन नेटवर्क व 27 सब स्टेशन बनकर तैयार हो जाएंगे। अल्ट्रा मेगा सौर पार्कों में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा इनके माध्यम से सीधे ग्रिड से जुड़ेगा। दूसरे चरण में राष्ट्रीय काॅरिडोर के साथ राष्ट्रीय ग्रिड को 20 गीगावाट अक्षय ऊर्जा की आपूर्ति की जाएगी। इस परियोजना को केंद्रीय वित्तीय सहायता से चलाया जाएगा। राज्य सरकार ने बजट में ट्रांसमिशन कार्य के लिए 1,554 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

गांवों में बिजली खपत कम करने की कोशिश

बाबूजी कल्याण सिंह ग्राम उन्नति योजना के तहत गांवों में बिजली की खपत कम करने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक 15 हजार सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा चुकी हैं। चालू वित्तीय सत्र में भी इतनी लाइटें लगाने का लक्ष्य है। इसी तरह पीएम कुसुम योजना में करीब 40 हजार सोलर सिंचाई पंप लगाए जा चुके हैं। वर्ष 2022-23 में करीब डेढ़ लाख सोलर लाइटें लगाई जा चुकी हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सौर ऊर्जा आधारित आरओ वाटर संयंत्र भी लगाए जा रहे हैं।

यूपीनेडा के निदेशक अनुपम शुक्ला का कहना है कि प्रदेश में हरित ऊर्जा को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। अयोध्या में सोलर सिटी तैयारी है। अन्य स्थानों पर भी सोलर सिटी बनेगा। इस क्षेत्र में सर्वाधिक निवेश होना साबित करता है कि यहां पर्याप्त संभावनाएं हैं। 



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