राजधानी लखनऊ में रेडियोलॉजिस्ट न होने से एक-एक कर तीन बड़े अस्पतालों में जांच बंद हो गई है। यहां आने वाले मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पताल भेजा जा रहा है। वहां भी भीड़ का दबाव होने के कारण मरीजों को मजबूरन निजी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
आलमबाग चंदरनगर 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय की ओपीडी में रोजाना करीब 500 मरीज आते हैं। डॉक्टर मर्ज के आधार पर इनमें से करीब 50 को जांचें करवाने के लिए लिखते हैं। उधर, यहां कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट असाध्य बीमारी के कारण एक वर्ष से छुट्टी पर हैं। इस कारण मरीजों की जांच का काम ठप है।
सीएमएस डॉ. आनंद त्रिपाठी ने बताया कि कुछ माह से सीएचसी की सोनोलॉजिस्ट के जरिये गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करवाया जा रहा था। अब वे भी मातृत्व अवकाश पर चली गईं हैं, जिससे अल्ट्रासाउंड ठप हो गया है। यहां के मरीजों को लोकबंधु चिकित्सालय भेजा जा रहा है। उधर, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मशीन करीब सात वर्ष से शोपीस बनी हुई है।
जांच के लिए भटकते हैं मरीज
महानगर के भाऊराव देवरस संयुक्त चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट की पुनर्नियुक्ति पर तैनाती थी। यह सेवा समाप्त होने के बाद से यहां भी जांच बंद है। गर्भवती महिलाओं को डफरिन और सामान्य मरीजों को जांच के लिए सिविल, बलरामपुर अस्पताल रेफर किया जा रहा है। वहां पर भी आसानी से जांच न होने से मरीज निजी केंद्रों पर जांच करवाने के लिए मजबूर हैं।
सीएमएस डॉ. रंजीत ने बताया रेडियोलॉजिस्ट अटैच किए जाने के लिए पत्र भेजा गया है। लखनऊ मंडल के अपर निदेशक, डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि जिन अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं, वहां दूसरे रेडियोलॉजिस्ट अटैच किए जाएंगे। मरीजों की जांच का काम जल्द शुरू कराया जाएगा।
