उत्तर प्रदेश में कागजों में खुद को दिव्यांग दिखाकर सॉल्वर के जरिये परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी करने वाले 50 लोगों के नामों का खुलासा हुआ है। इन सभी की नौकरियों पर तलवार लटकने लगी है। एसटीएफ और पुलिस और सुबूत व दस्तावेज जुटाने के बाद इनसे पूछताछ करेगी। आगे की तफ्तीश में फर्जीवाड़ा कर नौकरी हासिल करने वालों की संख्या और भी बढ़ेगी।
एसटीएफ ने 25 मार्च को गिरोह का खुलासा कर सरगना मनीष मिश्रा समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसमें तीन अभ्यर्थी व तीन सॉल्वर थे। ये सभी सीबीएसई द्वारा आयोजित जूनियर क्लर्क की भर्ती परीक्षा में शामिल थे। एसटीएफ की तफ्तीश में सामने आया था कि आरोपी पहले अभ्यर्थियों का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने थे, फिर उनकी जगह पर लेखक के रूप में सॉल्वर उपलब्ध करवाते थे। सॉल्वर को एक परीक्षा का 20-40 हजार रुपये देते थे।
सभी दिव्यांग कोटे से भर्ती हुए थे
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के पास मिले इलेक्ट्रॉनिक डाटा और उनसे हुई पूछताछ करीब पचास लोगों के नाम सामने आए हैं, जो वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं। गिरोह ने उनकी जगह पर सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास करवाई थी। ये सभी दिव्यांग कोटे से भर्ती हुए थे। इसमें सबसे अधिक बैंक के पदों पर अभ्यर्थी सेलेक्ट हुए थे। जांच एजेंसी और पुलिस इन सभी को जल्द ही नोटिस भेजेगी। विभाग के अधिकारियों को भी भेजी जाएगी। उन पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
दर्ज हो सकती है एफआईआर
मनीष पिछले एक दशक से परीक्षाओं में सेंधमारी करता आ रहा था। लगभग हर शहर में उसके सॉल्वर हैं। पुलिस अब उन सभी के बारे में जानकारी दे रही है जिनका चयन कराया और उनके स्थान पर जिन्होंने परीक्षा दी। साक्ष्य जुटाने के बाद इन सभी पर केस दर्ज हो सकता है। इसमें सबसे बड़ा खेल दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने वालों का रहा है। वहीं परीक्षा केंद्रों पर उसको कोई पकड़ भी नहीं पा रहा था। ये बड़ी नाकामी रही।
सोशल मीडिया के जरिये लगा सुराग
झांसी के रहने वाले एक शख्स ने सोशल मीडिया पर मनीष के बारे में कुछ पोस्ट किए थे। जिसमें बताया गया था कि मनीष लोगों को परीक्षाओं में पास करवाकर नौकरी लगवाता है। एसटीएफ को इसकी जानकारी हुई तो जांच शुरू की थी। सर्विलांस के जरिये जुटाई गई जानकारी के आधार पर तफ्तीश में मनीष के खिलाफ सुबूत मिले फिर पूरा खेल का खुलासा हुआ।
