
भारतीय रेलवे
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ट्रेनों का संचालन किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो इसके लिए भारतीय रेल में पहली बार हाई मैट्रिक्स तकनीक का इस्तेमाल झांसी में किया जा रहा है। वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन से लेकर यार्ड तक यह तकनीक स्थापित की जा रही है। इसका काम मार्च 2025 में पूरा कर लिया जाएगा।
इसके बाद अन्य मंडलों में भी यह तकनीक स्थापित की जाएगी। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंचाने के लिए भारतीय रेल पटरी से लेकर सिग्नल तक में बदलाव कर रही है। इसी बदलाव के क्रम में रेलवे अब अपनी पुरानी कॉपर आधारित सिग्नल केबल को भी आधुनिक हाई मैट्रिक्स तकनीक से बदलने जा रहा है।
इसमें पूरी सिग्नलिंग प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित होगी। इसमें ट्रेनों के संचालन में इस्तेमाल होने वाले भारी भरकम उपकरण, सिग्नल केबिन और रेल संचालन के लिए स्थापित होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर की भी आवश्यकता नहीं होगी।
यदि केबल में फॉल्ट आता है या वह किसी दूसरे कारण से भी क्षतिग्रस्त होती है, तो भी ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए झांसी स्टेशन से जुड़े यार्ड और मेन लाइन पर दोनों ओर पांच किलोमीटर के दायरे में टर्मिनल बनाए जा रहे हैं।
