उत्तर प्रदेश में राजकीय एवं स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में कंपनी बदलते ही आउटसोर्सिंग कर्मियों को हटाने का विरोध तेज होने लगा है। करीब 15 साल नौकरी करने के बाद बेरोजगार हुए ये कर्मी बृहस्पतिवार को लखनऊ पहुंचे और अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष से मुलाकात कर उन्हें पीड़ा सुनाई और मदद की गुहार लगाई।

आजमगढ़ से आए करीब 110 कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक दुर्गा प्रसाद के साथ अपर मुख्य सचिव से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया है कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण के समय जिन लोगों की जमीन ली गई थी उनके परिजनों को वर्ष 2009 से 2012 के बीच आउटसोर्सिंग के जरिये कॉलेजों में सुरक्षाकर्मी, वॉर्डब्वाय, ट्रॉली मैन, मरीज सहायक के पदों पर नौकरी दी गई थी। 

सरकार ने भी 19 मार्च 2025 को जारी आदेश में कहा था कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा। इसके बाद भी नए टेंडर में करीब 110 पद कम कर दिए हैं। प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र राव का कहना है कि सुरक्षा कर्मी के पद पर सैनिक कल्याण बोर्ड से रखने का आदेश है। इससे कुछ लोगों को हटाया गया है। इसी तरह कन्नौज, बदायूं, सहारनपुर से आए आउटसोर्सिंग कर्मियों ने भी मनमानी तरीके से हटाने का आरोप लगाया।

…इसलिए फंसा पेच

शासन ने 19 मार्च 2025 को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक को जारी आदेश में कहा था कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों, हृदय रोग संस्थान व जेके कैंसर संस्थान कानपुर, नर्सिंग कॉलेज कानपुर, पैरामेडिकल कॉलेज झांसी में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों के अलावा 2044 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की जरूरत है। इन्हें उप्र पूर्व सैनिक कल्याण निगम से तैनात किया जाए। आरोप है कि कॉलेज प्राचार्यों ने अतिरिक्त भर्ती के बजाय पहले से स्वीकृत पदों में ही कुछ लोगों को निकाल दिया और सैनिक कल्याण निगम से पूर्व सैनिकों को रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि कुछ लोग मिले थे। शिकायती पत्र दिया है। संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों से वस्तु स्थिति की जानकारी ली जा रही है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *