यूपी के रायबरेली में मनरेगा कर्मियों के मानदेय से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की कटौती कर धनराशि समय से जमा न कराने पर डलमऊ के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अशोक कुमार सचान के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुआ है। 

यह वारंट ईपीएफओ के रिकवरी ऑफिसर लखनऊ ने पुलिस अधीक्षक रायबरेली को पत्र लिखकर जारी किया है। बीडीओ को 27 मार्च तक 181386 रुपये की पेनाल्टी जमा करने का अंतिम मौका भी दिया है। अरेस्ट वारंट जारी होने के बाद उपायुक्त मनरेगा ने अपर आयुक्त को पत्र भेजकर मामले में मार्गदर्शन मांगा है।

मनरेगा में काम करने वाले संविदाकर्मियों के मानदेय से ईपीएफओ की कटौती करके अधिकारियों को संबंधित खातों में जमा करना होता है। अक्तूबर 2020 से मई 2021 के बीच में ईपीएफओ की धनराशि जमा करने में देरी होने पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने डलमऊ बीडीओ पर 181386 रुपये की पेनाल्टी लगा दी। 

बताते हैं कि इस संबंध में पूर्व में नोटिस आने के बाद जवाब भी भेजा गया, लेकिन ईपीएफओ के रिकवरी ऑफिसर ने बीडीओ के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया। यह वारंट जारी करने के साथ ही बीडीओ को 37 मार्च तक संबंधित धनराशि को जमा करने का मौका भी दिया। मामले का पत्र आने के बाद उपायुक्त मनरेगा ने अपर आयुक्त को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। हालांकि अरेस्ट वारंट जारी होने के बाद जिले के खंड विकास अधिकारियों में नाराजगी है।

उपायुक्त मनरेगा प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि खंड विकास अधिकारियों को मनरेगा कर्मियों के ईपीएफओ की धनराशि को एकत्र करके जमा करनी होती है। अक्तूबर 2020 से मई 2021 के बीच विलंब से धनराशि को जमा किया गया। इसी कारण अरेस्ट वारंट जारी किया गया है। प्रदेश के कई बीडीओ के खिलाफ ऐसा ही वारंट जारी हुआ है। मामले में अपर आयुक्त से मार्गदर्शन मांगा गया है।



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