
लोक सेवा आयोग परीक्षा विवाद।
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प्रतियोगी छात्रों के चल रहे प्रदर्शन के बीच लोक सेवा आयोग ने कहा है कि बदलते समय की आवश्यकताओं के दृष्टिगत व्यवस्था व परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाता रहा है। यही नहीं अन्य आयोगों की बेस्ट प्रैक्टिसेज, विशेषज्ञों के सुझाव आदि के आधार पर भी आवश्यक बदलाव किए जाते हैं। प्रतियोगी छात्रों की सुविधा और परीक्षाओं की शुचिता को देखते हुए आवश्यक बदलाव किए गए हैं।
आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि आयोग ने नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला पारदर्शी तरीके से प्रतियोगी छात्रों के बीच रखा। जहां किसी एक विज्ञापन के सापेक्ष एक से अधिक दिन, पाली में परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं। वहां परीक्षा के मूल्यांकन के लिए प्रसामान्यीकरण (नार्मलाइजेशन) की प्रक्रिया अपनाया जाना आवश्यक है, जैसा कि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित भर्ती निकायों, आयोगों में अपनाई जाती है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीट के लिए गठित राधाकृष्णन कमेटी ने भी दो पालियों में परीक्षा कराने की संस्तुति की है। वहीं पुलिस भर्ती परीक्षा भी कई पालियों में कराई गई। इस पूरी व्यवस्था में कम से कम मानव हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा रहा है। सब कुछ सिस्टम आधारित है। तकनीकी का प्रयोग कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। मूल्यांकन में रोल नंबर को फेक नंबर में बदलकर नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया की जाएगी। इससे किसी अभ्यर्थी का रोल नंबर मालूम नहीं चलेगा व मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरीके से पारदर्शी होगी।
आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व में लागू स्केलिंग प्रणाली को छात्रों के आग्रह पर समाप्त किया गया है। वर्तमान आयोग ने इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है। पूर्व में पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में एक पद के सापेक्ष में 13 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया जाता था। आयोग ने इसे बढ़ाकर 15 गुना कर दिया है ताकि अधिक अभ्यर्थियों को लाभ हो। इसके अलावा पूर्व में पीसीएस इंटरव्यू में एक पद के सापेक्ष दो अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया जाता था। अब एक पद के सापेक्ष तीन अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाया जा रहा है।
