थाने-चौकी में काम का बोझ पुलिसकर्मियों को मानसिक तनाव दे रहा है। अब इस तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए मनोचिकित्सक उनकी सहायता करेंगे।


Psychologists to Reform Police Behaviour After Recent Incidents in Agra

UP Police, यूपी पुलिस
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स



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थाने-चाैकी में काम का बोझ है। बच्चे और पत्नी से बात नहीं कर पाते हैं। छुट्टी नहीं मिल पाती। ये सभी वजहें कई बार पुलिसकर्मियों में तनाव का कारण बनती हैं। ऐसे में आम जनता से दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं। हाल ही में हुईं घटनाओं के बाद कमिश्नरेट पुलिस के व्यवहार को बदलने के लिए कवायद शुरू हो गई है। मनोचिकित्सक और व्यवहार विज्ञानियों का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा।

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किरावली थाने में किसान की पिटाई और पैर तोड़ देने के साथ छत्ता पुलिस ने दूध विक्रेता को चौकी में पीटा था। पैर का नाखून उखाड़ दिया था। इन घटनाओं ने पुलिस के व्यवहार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कुछ महीने पहले व्यवहार विज्ञानियों की टीम ने पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर सर्वे किया था। इसमें सामने आया था कि वर्दी पहनने के बाद पुलिसकर्मी खुद को सबसे अलग समझने लगते हैं।

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