बलरामपुर के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों से अवैध धर्मांतरण के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर की मिलीभगत रही। आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने छांगुर, नीतू , नवीन व महबूब सहित 10 के विरुद्ध दर्ज मुकदमों में इसका जिक्र किया है। अब बात सिस्टम की गठजोड़ से आगे।
असल में जिस कोतवाल की छत्रछाया में छांगुर बढ़ा, उसने लखनऊ में करोड़ों की जमीन खरीदी है। अपर मुख्य सचिव, गृह एवं गोपन विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि उतरौला में छांगुर ने करीब 2010 से ही जड़ जमाना शुरू कर दिया था।
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अवैध धर्मांतरण का आरोपी छांगुर व ढहाये गए उसके ठिकाने। (फाइल फोटो)
– फोटो : amar ujala
एक चर्चित कोतवाल ने छांगुर और उससे जुड़े लोगों को हर तरह से मदद की। उनके कहने पर विपक्षियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया। कुछ जमीनों और मकानों पर कब्जा भी कराया। इसके बदले छांगुर ने पानी की तरह पैसा बहाया।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला से छांगुर को ले जाती एटीएस। (फाइल फोटो)
संबंधित कोतवाल ने इसी दौरान लखनऊ में करीब 15 हजार स्क्वायर फीट जमीन खरीदी। वह भी इकाना क्रिकेट स्टेडियम के पास। यहां अभी जमीन की औसत कीमत करीब चार हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट है। बाजार भाव के अनुसार जमीन की अभी कुल कीमत करीब छह करोड़ रुपये है।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला में स्थित छांगुर का घर। (फाइल फोटो)
अब सवाल यह है कि इतने गंभीर मामले में नाम जुड़ने के बाद भी उस चर्चित कोतवाल पर तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? अब जब छांगुर के पूरे गिरोह से पर्दा हटना शुरू हुआ और कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो वही कोतवाल देवीपाटन मंदिर में करीब रोज ही माथा टेकने पहुंच रहा है।
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बलरामपुर के मधपुर उतरौला में स्थित छांगुर का घर ईडी की टीम (फाइल फोटो)
– फोटो : संवाद
बलरामपुर पुलिस और छांगुर का गठजोड़ आ रहा सामने
धर्मांतरण के सादुल्लानगर कनेक्शन के बाद धीरे-धीरे बलरामपुर पुलिस और छांगुर का गठजोड़ सामने आने लगा है। यह अलग बात है कि तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह की जांच रिपोर्ट अब भी फाइलों में दबी शासन में धूल फांक रही है।