
यूपी पुलिस में भर्ती।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुलिस के लेखा एवं गोपनीय संवर्ग के संवेदनशील पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती किए जाने का पत्र कल जारी हुआ। देर शाम ही डीजीपी मुख्यालय से यह स्पष्ट कर दिया गया कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है और यह भूलवश हो गया है। इसके बाद गुरुवार को प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने यह मुद्दा उठाया।
पुलिस के लेखा एवं गोपनीय संवर्ग के संवेदनशील पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती किए जाने का गलत पत्र जारी होने के प्रकरण की जांच शुरू कर दी गयी है। एडीजी स्थापना संजय सिंघल ने बताया कि यह पत्र किन परिस्थितियों में जारी हुआ और उसे बिना परीक्षण के शाखाओं में भेजा गया, इसकी गहनता से जांच का जिम्मा अपर पुलिस अधीक्षक, स्थापना को सौंपा गया है। जांच में दोषी पाए गये अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह पत्र चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की आउससोर्सिंग से भर्ती कराने के बारे में जारी होना था। पुलिस विभाग में 40 पदों पर आउससोर्सिंग के जरिए भर्ती करने का नियम है, जिसमें से 30 पदों पर वर्तमान में भर्ती भी होती है। लेखा, लिपिक और गोपनीय संवर्ग के उपनिरीक्षक एवं सहायक उपनिरीक्षक के पदों पर सीधी भर्ती की जाती है, जिसका अधियाचन कुछ दिन पहले पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड भेजा जा चुका है। बता दें कि उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने बीते वर्ष नवंबर माह में मिनिस्टीरियल संवर्ग के 910 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन भी जारी किया था।
