
दुधवा नेशनल पार्क में विचरण करता बाघ। फाइल फोटो।
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प्रदेश में पर्यटकों को बाघों का आसानी से दीदार कराने के लिए ईको टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। इसके लिए दुधवा, कतर्नियाघाट और पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीएफ) के लिए फोरलेन सड़कों का निर्माण होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव जल्द ही राज्य वन्यजीव बोर्ड में रखे जाएंगे।
दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में चूका बीच जैसे ईको टूरिज्म के स्थलों तक फोरलेन रोड कनेक्टिविटी का निर्णय लिया गया है। प्रयास है कि इनमें से किसी भी एक स्थान के लिए पर्यटकों के आने पर उन्हें दूसरे स्थान का भ्रमण करने के लिए भी प्रेरित किया जा सके। इससे जहां पर्यटकों के लिए बाघ दिखाई देने की संभावना बढ़ेगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।
इस योजना के तहत दुधवा नेशनल पार्क के लिए लखीमपुर खीरी-दुधवा मार्ग को दो से चार लेन किया जाएगा। इसकी कुल लंबाई 81 किलोमीटर है। कतर्नियाघाट वाइल्ड लाइफ सेंचुरी तक सुगम आवागमन के लिए बहराइच-मिहीपुरवा मार्ग (65 किमी) और ढकेरवा-लखीमपुर मार्ग (39 किमी) को दो से चार लेन करने का फैसला भी किया गया है।
इसी तरह से पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बनकटी-महोफ-रेस्ट हाउस ग्रामीण मार्ग (15 किमी) और पीलीभीत माधोटांडा दो लेन मार्ग (30 किमी) को भी मजबूत किया जाएगा। भविष्य में योजना पीलीभीत टाइगर रिजर्व को मुख्य मार्ग से इतर आंतरिक सड़कों से कतर्नियाघाट से सीधे जोड़ने की भी योजना है। इसके लिए भी अध्ययन कराया जा रहा है।
