140 रुपये के गबन के आरोप में 33 साल पहले फंसे एक सिपाही को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-अचल प्रताप सिंह ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सिपाही पर एस्कोर्ट ड्यूटी में होने के बाद भी तीन दिन का भत्ता लेने का आरोप लगा था। प्रकरण में जीआरपी के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक ने आगरा कैंट स्थित जीआरपी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
तत्कालीन उपाधीक्षक व्यास देव श्रोतिया की ओर से 27 मई 1993 को दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार जीआपी में तैनात सिपाही रामअवतार ने होमगार्ड वीरेंद्र सिंह और अनिल कुमार त्यागी के साथ झांसी पेसेंजर में आगरा कैंट से धौलपुर तक 1 सितंबर 1991 से 8 सितंबर 1991 तक सात दिन तक जाना बताया था। इसके एवज में 6 फरवरी 1992 को 140 रुपये भत्ता प्राप्त किया। जांच में पता चला कि सिपाही मात्र तीन दिन एस्कोर्ट ड्यूटी में गए थे। 140 रुपये के शासकीय धन का गबन कराने पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।