लखनऊ में हुई एक हृदयविदारक घटना ने जालौन के कोतवाली क्षेत्र के ग्राम उदोतपुरा को गहरे शोक में डुबो दिया है। राजधानी के आशियाना क्षेत्र के सेक्टर एल-91 में रहने वाले शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की चार दिन पूर्व उनके ही बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पैतृक गांव में स्तब्धता और मातम का माहौल छा गया।
मूल रूप से उदोतपुरा निवासी मानवेंद्र सिंह करीब 25 वर्ष पूर्व पढ़ाई के सिलसिले में लखनऊ चले गए थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह राजावत उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा पद से सेवानिवृत्त हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद मानवेंद्र ने लखनऊ को ही स्थायी ठिकाना बना लिया।

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शराब कारोबारी हत्या के बाद पुलिस को मौके पर लेकर जाता आरोपी बेटा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं उनका विवाह हुआ और उन्होंने पैथोलॉजी के क्षेत्र में काम शुरू किया। जानकारी के अनुसार, राजधानी में उनके लगभग एक दर्जन पैथोलॉजी सेंटर संचालित थे। बाद में वह शराब के कारोबार से भी जुड़ गए थे।

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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के बाद गमगीन परिजन
– फोटो : शुभम बंसल
‘मानवेंद्र का गांव आना-जाना बेहद कम हो गया था’
वर्ष 2017 में उनकी पत्नी का निधन हो गया था। परिवार में बेटा अक्षत प्रताप सिंह और एक बेटी उनके साथ रहते थे। ग्रामीणों के अनुसार, मानवेंद्र का गांव आना-जाना बेहद कम हो गया था। लगभग दो वर्ष पहले वह एक पारिवारिक कार्यक्रम में गांव आए थे।

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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या के बाद आरोपी बेटे को घर लाती पुलिस
– फोटो : शुभम बंसल
‘सभी से आत्मीयता से मिलते-जुलते थे’
गांव में उनका बचपन बीता था। लोग उन्हें मिलनसार और हंसमुख स्वभाव का बताते हैं। जब भी आते, सभी से आत्मीयता से मिलते-जुलते थे। ग्रामीणों ने बताया कि अक्षत प्रताप सिंह का गांव में आना बहुत कम हुआ। चार-पांच वर्ष पूर्व वह कुछ समय के लिए गांव आया था।

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शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
‘गांव के बच्चों के साथ खेलते-कूदते उसे देखा गया था’
उस समय उसकी उम्र कम थी और वह पढ़ाई में मेधावी प्रतीत होता था। गांव के बच्चों के साथ खेलते-कूदते उसे देखा गया था। नौ फरवरी को सुरेंद्र पाल सिंह राजावत द्वारा गांव में भागवत कथा का आयोजन कराया गया था।
