कोतवाली पुलिस ने विकसित भारत जी राम जी (मनरेगा) योजना के नाम पर ग्रामीणों को ठगने वाले चार साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी ग्रामीणों के आधार कार्ड और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल कर फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते खोलते थे। इसके बाद इन सिमों और खातों को मोटी रकम लेकर प्रदेशों के बाहर बैठे साइबर अपराधियों को बेच देते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वोडाफोन के 50 और एयरटेल के 23, कुल 73 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं।
थाना जसवंतनगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम कुरसैना और हनुमंत खेडा में कुछ लोग ग्रामीणों को धोखा देकर उनकी आईडी पर फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवा रहे हैं। यह गिरोह एयरटेल व वोडाफोन के पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) एजेंटों के साथ मिलकर काम कर रहा था। आरोपी ग्रामीणों के आधार कार्ड और अंगूठे के निशान लेकर सिम एक्टिवेट करवाते थे। इसके बाद इन सिमों का उपयोग करके एनएसडीएल (नेशनल सेक्योरिटीस डिपास्जिटरी लिमिटेड) पेमेंट बैंक में खाते खोलकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ग्राम हनुमंत खेडा से चार अभियुक्तों – शिशुपाल सिंह उर्फ अनिल (35), हिमांशु, विमलेश कुमार और संजीव कुमार राठौर को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में शिशुपाल ने बताया कि वे गांव वालों को बहला-फुसलाकर उनकी आईडी पर सिम लेते थे और फिर पीओएस एजेंटों की मदद से सिम एक्टिवेट करवाकर बैंक खाते खुलवाते थे।
गिरफ्तार अभियुक्तों में से संजीव कुमार राठौर का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है, जिसके खिलाफ पहले भी विभिन्न धाराओं में कई प्राथमिकी दर्ज हैं। थाना जसवंतनगर में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है। सीओ आयुषी सिंह ने बताया कि आरोपियों के तीन अन्य सहयोगियों की भी पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है। यह गिरोह मुंबई और पुणे जैसे शहरों में बैठे ठगों को ये सिम कार्ड और खाते बेचता था, जिसके एवज में उन्हें अच्छी खासी रकम मिलती थी। इस प्रकार, इन साइबर ठगों का नेटवर्क कई प्रदेशों तक फैला हुआ था, जो भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाकर गंभीर वित्तीय अपराधों को अंजाम दे रहा था।
