प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में लगे शिक्षामित्रों व कर्मचारियों की मौत से शिक्षक संगठनों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि उनका काम शिक्षण कार्य है, उसके बावजूद प्रशासन जबरन उनसे निर्वाचन से जुड़े कार्य कराता है। अत्यधिक दबाव के चलते वह काल के गाल में समा रहे हैं। इनके परिजनों को सरकारी नौकरी व मुआवजा दिया जाए।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने कहा कि कुछ बीएलओ ऐसे हैं जो पहली बार नियुक्त किए गए हैं। काफी दबाव के चलते वह काल के गाल में समा रहे हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि बीएलओ को प्रशासनिक अधिकारी लक्ष्य पूरा करने का दबाव देते हैं। तकनीकी समस्याओं के कारण व सामाजिक सहयोग न मिलने के कारण लक्ष्य पूरा न होने पर वेतन रोकने आदि की धमकी दी जाती है।

संगठन इसकी निंदा करता है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों से शिक्षकों के इस मामले में फोन आ रहे हैं। यह अव्यवहारिक व निंदनीय है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन का कार्य साल भर होता है। चुनाव आयोग को इसके लिए संविदा पर कार्मिकों की नियुक्त करनी चाहिए।

उन्होंने मांग की है कि जितने भी बीएलओ की जान गई है, उनको एक करोड़ का मुआवजा, परिवार को सरकारी नौकरी, उनके माता-पिता को चिकित्सीय बीमा, बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाए।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 10 दिसंबर से परिषदीय विद्यालयों में अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उसके बाद बच्चों का निपुण आकलन होना है। बिना शिक्षक बच्चे कैसे परीक्षा देंगे। उन्होंने शासन से शिक्षकों को तत्काल बीएलओ के कार्य से मुक्त कराने की मांग की है। अन्यथा शिक्षक इसके लिए आंदोलन को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

चर्चाओं में बीएलओ सर्वेश की मौत

हाल ही में बीएलओ के माम में लगे शिक्षक सर्वेश की मौत चर्चाओं में है। मुरादाबाद में बीएलओ सर्वेश सिंह ने सुसाइड नोट में अपने स्कूल के बच्चों के प्रति प्यार और दिल की कशमकश को दर्शाया है। उन्होंने लिखा मुझे माफ करना मेरे विद्यालय के प्यारे बच्चों। बहुत बहुत प्यार। मन लगाकर पढ़ाई करना मेरे बच्चों, दिल बहुत दुख रहा है। लिखते हुए मन नहीं मान रहा है। कुछ समय से आपको (बच्चों को) शिक्षण कार्य नहीं करा पाया। 



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