नदी में डूबे युवकों को तलाशने के लिए चलाए गए सर्च ऑपरेशन को रविवार को 100 घंटे पूरे हो गए। रविवार को टूटती उम्मीद में सेना का नया प्लान काम आया। इसके लिए ग्रामीणों ने भी मेहनत की। भूमिगत सबमर्सिबल पंप को बाहर निकालने में मददगार कंप्रेसर का सहारा लिया गया। इस देसी जुगाड़ ने काम करते हुए आधा घंटे में शव को बाहर निकाल दिया। इससे अब पीड़ित परिवारों में अपनों के अंतिम बार मिलने की उम्मीद बंध गई है। सोमवार को सर्च शुरू होगा तो तीन कंप्रेसर की मदद से स्कूबा डाइवर अभियान चलाएंगे।

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खेरागढ़ स्थित उटंगन नदी में डूबे 12 लोगों को निकालने के लिए 2 अक्तूबर को शाम 6 बजे से बृहद स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था। पहले दिन एसडीआरएफ के 20 जवान पहुंचे थे। शुक्रवार को एनडीआरएफ को बुलाया गया। इसके बाद 50 पैरा ब्रिगेड की 411 पैरा फील्ड यूनिट का दल पहुंचा। 4 टीमों में शामिल 7-7 स्कूबा डाइवर ने ऑक्सीजन सिलिंडर और रस्सी की मदद से पानी के अंदर जाकर देखा। मगर पानी में मिट्टी अधिक होने के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ा। नदी में पानी का स्तर 3 से 4 फीट तक ही था। इस कारण हाथ लगाकर मिट्टी में तलाश की गई। हालांकि गड्ढे में ऐसा नहीं हो सका।

 




Utangan River Tragedy: After 100 Hours Army’s Local Innovation with Compressor Recovers First Body

बांध बनाते ग्रामीण
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


शनिवार को बांध बनाया गया। मगर यह भी कारगर नहीं हुआ। नदी में रात के समय पानी का स्तर बढ़ने की वजह से बांध डूब गया। रविवार को एक बार फिर बांध बड़ा करने और पानी की धारा को मोड़ने के लिए एक तरफ से बनाए गए नाले को 30 से 40 फीट तक चाैड़ा कर दिया। मगर इससे भी घटनास्थल और नदी में पानी का स्तर कम नहीं हो सका। इससे लोगों की उम्मीद टूटने लगी। सब्र भी जवाब देने लगा था। वहीं सर्च ऑपरेशन में लगे सभी दलों के जवानों की भी गति धीमी हो गई थी। इसको देखते सैन्य टीम ने प्रशासनिक अधिकारियों से बात की।

 


Utangan River Tragedy: After 100 Hours Army’s Local Innovation with Compressor Recovers First Body

तलाश में जुटी सेना
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


चेयरमैन खेरागढ़ सुधीर गर्ग ने बताया कि सैन्य दल ने एक ऑपरेशन में पानी में फंसे शवों को कंप्रेसर की मदद से निकाला था। इस पर यहां भी इसी तरह से निकालने का निर्णय किया गया। मगर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह ने कंप्रेसर से मिट्टी में फंसे शवों में नुकसान होने की आशंका जाहिर की। उधर, नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल से भी इस योजना के संबंध में विचार विमर्श किया गया। बाद में परिजन से सहमति लेने के पर सहमति बनी। इस पर चेयरमैन ने परिजन को बुलाकर बात की। उनसे लिखित में लिया गया कि अगर कंप्रेसर से सर्च के दाैरान किसी तरह का नुकसान होगा तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। इस पर सभी ने सहमति जाहिर की। इसके बाद कंप्रेसर से कार्य शुरू करा दिया गया।

 


Utangan River Tragedy: After 100 Hours Army’s Local Innovation with Compressor Recovers First Body

कंप्रेसर को नदी में फंसे लोगों को निकालने के लिए इस्तेमाल
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


जमीन में फंसे सबमर्सिबल पंप निकालने में होता है इस्तेमाल

चेयरमैन खेरागढ़ सुधीर गर्ग ने बताया कि जिन कंप्रेसर को नदी में फंसे लोगों को निकालने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, उनका प्रयोग जमीन के अंदर 100 से 300 फीट तक फंसे सबमर्सिबल पंप को बाहर निकालने में किया जाता है। कई बार पंप बालू के आने की वजह से फंस जाते हैं। ऐसे में कारीगर कंप्रेसर से हवा के पाइप को भूमिगत पंप की पाइप लाइन में डालते हैं। हवा का दबाव काफी तेज होता है। इससे मिट्टी या बालू हट जाती है और पंप बाहर आ जाते हैं। अब उटंगन में लोगों को निकालने के लिए 3 कंप्रेसर को लगाया जाएगा।

 


Utangan River Tragedy: After 100 Hours Army’s Local Innovation with Compressor Recovers First Body

ग्रामीणों की भीड़
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


पानी के अंदर लेकर गए थे कंप्रेसर का पाइप, हटी मिट्टी

सर्च ऑपरेशन में भी कंप्रेसर के पाइप को नदी में डाला गया। इस पाइप को स्कूबा डाइवर अंदर लेकर गए थे। उन्होंने पाइप की मदद से गड्ढे में मिट्टी को हटाया। तकरीबन 30 मिनट तक मिट्टी को हटाने के बाद करन का शव बाहर आ गया। उसे किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचा। इससे लग रहा है कि बाकी लोगों को तलाशने में यह मददगार साबित होगा। क्योंकि जिस स्थान पर सभी डूबे थे, वहां पर खनन की वजह से गड्ढा हुआ था। यह तकरीबन 25 से 30 फीट तक गहरा है। इसमें दलदल की वजह से फंसे लोग बाहर नहीं आ सके।

 




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