– झांसी के रेल कोच फैक्टरी में होगी रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत की मरम्मत
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। वंदे भारत एक्सप्रेस को सजाने-संवारने का काम नगरा हाट के मैदान में बनी रेल कोच नवीनीकरण फैक्टरी को मिल गया है। सितंबर तक छह लाख किलोमीटर का सफर पूरा कर लेने के बाद पहली ट्रेन के रूप में हजरत निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदे भारत एक्सप्रेस कोच फैक्टरी पहुंचेगी। यहां फैक्टरी प्रशासन ने वंदे भारत के लिए शेड और मशीनरी की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। इसका जिम्मा रेलवे की सहयोगी संस्था रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपा गया है।
अक्तूबर 2020 में शुरू किए गए फैक्टरी का निर्माण पूरा होने के बाद से यहां एलएचबी कोच की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। 80 एकड़ भूमि पर 493 करोड़ से बनी फैक्टरी को लगातार विकसित किया जाता रहा है। रेलवे अफसरों के मुताबिक पहले यहां पर केवल लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों का नवीनीकरण करने की योजना थी। लेकिन, अब रेलवे बोर्ड ने यहां वंदे भारत के लिए कोचों का नवीनीकरण कराने के लिए भी कहा है। कार्यदायी संस्था रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने तैयारी शुरू कर दी है।
छह लाख किमी चलने के बाद होती है वंदे भारत की मरम्मत
सामान्य एलएचबी कोचों की मरम्मत का काम जहां 18 माह चलने के बाद होता है। छह लाख किमी का सफर तय करने के बाद वंदे भारत की मरम्मत की जाती है। 2 अप्रैल 2023 में शुरू हुई वंदे भारत सितंबर में यह उपलब्धि प्राप्त कर लेगी।
आठ शेड से होकर गुजरेगी वंदे भारत
फैक्टरी में 10 बड़े शेड का निर्माण किया गया है। इनमें दो शेड प्रशासनिक कार्य और स्टोर के रूप में इस्तेमाल किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य आठ शेड में कोच नवीनीकरण के अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे। आरवीएनएल के तकनीकी विशेषज्ञ ने बताया कि कोच को सेवा के लिए भेजने से पहले इन आठ शेड में की जाने वाली साज-सज्जा प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। जब सभी शेड से कोच को हरी झंडी मिल जाएगी, तभी कोच को बाहर भेजा जाएगा।
वर्जन
सितंबर में छह लाख किमी का सफर तय कर लेने के बाद रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदेभारत हमारे पास मरम्मत और साज सज्जा के लिए आएगी। इसके लिए हमने लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आगामी दिनों में अन्य वंदे भारत की मरम्मत का कार्य भी हम करने के लिए सक्षम होंगे।
अतुल कनौजिया, मुख्य कारखाना प्रबंधक, रेल कोच नवीनीकरण फैक्टरी
