
प्रो. कमलेश सिंह
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आईआईटी बीएचयू में बुधवार को ई-कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें प्रबंधन के साथ ही इसके रिसाइकिलिंग पर चर्चा हुई। प्रो. कमलेश सिंह ने बताया कि 2014 में 1.3 मिलियन टन ई-कचरा निकला जो वर्ष 2015 में 1.7 मिलियन टन हो गया।
उन्होंने बताया कि दुनिया भर में हुए शोधों में सामने आया कि ई-कचरा जैसे टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, डीवीडी, कैलकुलेटर आदि में सिर्फ नुकसान पहुंचाने वाले तत्व प्लास्टिक, शीशा ही नहीं बल्कि कई बहुमूल्य तत्व जैसे लिथियम, सोना, चांदी, कॉपर, एल्युमिनियम आदि भी पाए जाते हैं। एक टन पत्थर काटने पर 1-5 ग्राम सोना निकलता है। लेकिन 1 टन ई-कचरा (स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप) में 100 से 300 ग्राम सोना भी निकल सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में गहनों के लिए पसंद बन रहे टैंटलम मेटल और लिथियम भी ई-कचरे से मिल रहा है। अगर शहरों और ग्रामीण स्तर पर ई-कचरा कलेक्शन सेंटर बनाए जाएं तो इससे न सिर्फ रोजगार के लिए बेहतर विकल्प बनेगा, बल्कि ई-कचरा से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकता है। इस दौरान उपकुलसचिव मेजर निशा बलोरिया, रवि कुमार आदि मौजूद रहे।
