आध्यात्मिक नगरी काशी में कमिश्नरेट बनने से पहले और पांच साल बाद भी शहर को जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पाई। शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सैकड़ों बार बैठकें हुईं, 110 से ज्यादा ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयोग किए गए। आमजन, व्यापारियों और अन्य वर्गों से सुझाव मांगे गए। फीडबैक पर अमल हुआ, लेकिन परिणाम वहीं निकला। एक जगह से जाम कम हुआ तो दूसरी जगह शिफ्ट हो गया।
कमिश्नरेट के गठन के बाद जिले में 13 आईपीएस, 21 पीपीएस और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सड़कों पर 280 पुलिसकर्मी तैनात हैं। जाम से निजात दिलाने के लिए जितनी योजनाएं बनीं, जितने प्रयोग हुए और जितनी फोर्स सड़कों पर उतारी गई, उतना शायद प्रदेश के किसी अन्य कमिश्नरेट में नहीं हुआ।
