लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) परिसर में शुक्रवार को वास्तुकला के विविध रंग बिखरे। कैंपस में नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स ऑफ आर्किटेक्चर (नासा) के 67वें जोनल सम्मेलन में एक तरफ जहां स्कल्पचर में मिट्टी को डिजाइन करने में रचनात्मकता दिखाई तो कम्प्यूटर साॅफ्टवेयर की प्रतियोगिता में रिवरफ्रंट के री-डेवलपमेंट की योजना तैयार की।
विभिन्न प्रदेशों से आए युवा आर्किटेक्ट की टीमें 24 घंटे लगातार बिना रुके एक अंत्येष्टि स्थल की डिजाइन तैयार कर रही हैं। अलग-अलग धर्म के लोगों के लिए एक ही स्थल के निर्माण की डिजाइन तैयार करनी है। इसके लिए उन्हें कोयंबटूर का एक मॉडल भी दिया गया। इस प्रतियोगिता में 23 टीमों के कुल 138 विद्यार्थी शिरकत कर रहे हैं। दूसरी तरफ ””कहूट्स”” में विभिन्न राज्यों से आए युवा आर्किटेक्ट की चार-चार की एक कॉमन टीम को गोमती रिवरफ्रंट के री-डेवलपमेंट के लिए साॅफ्टवेयर से डिजाइन तैयार करने का चैलेंज दिया गया। वहीं, रूबिंस प्रतियोगिता में 25 संस्थानों के छात्रों ने अपने प्रोजेक्ट, मॉडल आदि की प्रदर्शनी लगाई।
शाम को वाद-विवाद व रस्साखींच आदि प्रतियोगिताएं भी हुईं। सम्मेलन का संयोजन डॉ. आंजनेय शर्मा ने किया। डॉ. फरहीन बानो, गिरीश पांडेय, धीरज यादव, रोहित परमार आदि ने सहयोग दिया। बता दें कि यूपी में यह सम्मेलन पहली बार हो रहा है। इसकी मेजबानी एकेटीयू का वास्तुकला एवं योजना संकाय कर रहा है। इस वर्ष के जोनल सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और छत्तीसगढ़ के 25 से कॉलेजों के 600 छात्र शिरकत कर रहे हैं।
