
बाह सीएचसी में लगाया गया वेंटिलेटर
– फोटो : संवाद
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उत्तर प्रदेश के आगरा में टूटती सांसों को जिंदगी देने के लिए कोरोना महामारी में दिए गए वेंटिलेटर वार्ड में दम तोड़ रहे हैं। चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आठ वेंटिलेटर लगे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने से सालभर में एक भी मरीज को लाभ नहीं मिल सका।
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जिले में 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें कोरोना महामारी में 2021-22 में बरौली अहीर, बाह, खंदौली और सैंया में कोविड वार्ड बनाए गए थे। इनमें दो-दो वेंटिलेटर भी लगे हैं। तीन साल में इन वेंटिलेटर का उपयोग नहीं हुआ।
कोरोना का प्रकोप खत्म होने पर भी विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में इनका इस्तेमाल गंभीर मरीजों के इलाज में नहीं किया जा रहा है। इससे देहात के गंभीर मरीजों को परेशानी हो रही है और मजबूरन एसएन, निजी अस्पताल में मरीजों को लेकर जाना पड़ रहा है।
सीएचसी पर हो वेंटिलेटर सुविधा
सरकार ने वेंटिलेटर की सुविधा दी है और इनका इस्तेमाल गंभीर मरीजों के लिए सीएचसी पर ही होने लगे तो निजी अस्पतालों में इलाज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे ग्रामीण मरीजों के लिए बड़ी सुविधा हो जाएगी, शासन से इस बाबत पत्र भी लिखेंगे। -अरविंद चाहर, सामाजिक कार्यकर्ता किरावली
दावा: स्टाफ को किया प्रशिक्षित
कोरोना महामारी में मिले वेंटिलेटर ठीक हाल में हैं। ये सीएचसी वार्ड में लगे हुए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने कारण स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। टेली मेडिसिन के जरिये गंभीर मरीजों के लिए इनका इस्तेमाल होगा। इसके लिए एसएन में सेंटर बनाया जा रहा है। -डॉ. अरुण श्रीवास्तव, सीएमओ
