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श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध शुरू हो गया है। बुधवार को एक दर्जन से अधिक श्रम संगठनों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। परिसर में लाल झंडे ही दिखाई दे रहे थे। श्रमिक नेताओं ने कहा, मजूदरों को जितना गुलाम वर्तमान सरकार बना रही है, उतने गुलाम तो मजदूर अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं रहे। प्रदर्शन में अखिल भारतीय असंगठित कर्मचारी मजदूर यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, संगठित एवं असंगठित मजदूर संगठन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल, यूपी रोडवेज इंप्लाइज यूनियन सहित एक दर्जन संगठनों ने नए श्रम कानूनों की वापसी के लिए राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट वेद सिंह चौहान को सौंपा। श्रमिक नेता भगवान सिंह ने कहा कि 44 श्रम कानूनों को खत्म कर सरकार ने 4 कानूनों में बदल दिया है। नए श्रम कानून में 300 कर्मचारियों के प्रतिष्ठानों में छंटनी के लिए सरकार से इजाजत लेने की जरूरत नहीं, जबकि पहले 20 कर्मचारियों से अधिक वाले प्रतिष्ठानों को सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी।