Villagers forced to defecate in the open, unknown responsible

जुड़पनिया में बने शौचालय में रखे उपले।

श्रावस्ती। सरकार की लाख कवायद के बाद भी स्वच्छता अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनवाकर गांवों को तो ओडीएफ कर दिया गया है, लेकिन अभी भी गांवों में पहले जैसी ही स्थिति है। लोग शौचालयों का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कहीं-कहीं शौचालयों में उपले और लकड़ियां रखी गई हैं तो कहीं आधा अधूरा शौचालय बना हुआ है। ग्रामीण आज भी शौचालय का प्रयोग न कर खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। जिसपर जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं।

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सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का शुभारंभ वर्ष 2014 में किया गया था। इसके तहत प्रशासन की ओर से विगत करीब 10 वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च कर शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसके बाद श्रावस्ती को खुले में शौच मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है। जबकि हकीकत इसके विपरीत है। सिर्फ गांव ही नहीं नगर में भी तमाम परिवार ऐसे हैं, जिन्हें अब तक शौचालय की सुविधा नहीं मिली है। शौचालय के अभाव में लोग आज भी बाहर शौच के लिए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश शौचालयों में उपले, लकड़ी और पुआल आदि रखने का कार्य किया जा रहा है। वहीं, कई शौचालयों में दरवाजे तक नहीं लगे हैं।

इन गांवों के शाैचालय बदहाल

भारत मिशन ग्रामीण के तहत हर घर में शौचालय अभियान चलाकर घरों में शौचालय बनाने के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया गया। इसकेे बावजूद सिरसिया के जुड़पनिया, सचौली, बरथनवा, हेमपुर, रंजीतपुर, बंड़रहवा सहित कई अन्य गांव में बने शाैचालय बदहाल हैं।

कराई जाएगी जांच

आपसे जानकारी हुई है। इन सभी गांवों की जांच कराई जाएगी। जो भी शौचालय का उपयोग नहीं कर रहे हैं, उन पर जो भी संभव होगी कार्रवाई की जाएगी।

नंदलाल, डीपीआरओ



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