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कुठौंद/उरई। बुंदेलखंड की बदहाली और उसकी प्यास बुझाने के लिए भले ही प्रदेश और दिल्ली की सरकारों से राहत कम मिल सकी हो पर प्रकृति ने बुंदेलखंड को प्राकृतिक संपदा का भंडार भी दिया है। खनिज संपदा से लेकर पांच नदियों की अविरलता इसे समृद्धशाली बनाती रही है। हालांकि इन नदियों का बहने वाला जल अभी तक किसानों के काम नहीं आ सका है।
यहां पचनद पर बांध बनाने का प्रस्ताव 48 साल बाद भी जमीनी हकीकत की राह देख रहा है। जालौन, औरैया और कानपुर देहात की हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने की लिए प्रस्तावित पचनद बांध परियोजना किसानों को लिए किसी वरदान से कम नहीं है, लेकिन आज भी इस योजना को लेकर तस्वीर साफ नही हो सकी है।
एक समय यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहूज जैसी पांच नदियों के संगम पचनद बैराज पर बहुप्रतीक्षित बैराज बनने की स्वीकृति मिलने से सीमावर्ती इलाके के किसानों और ग्रामीणों में खुशी थी। करीब 2600 करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना से जालौन, इटावा, औरैया, कानपुर देहात की हजारों हेक्टेयर असिंचित भूमि को बांध से नहरें निकाल कर सिंचित किए जाने की योजना थी।
इस योजना से एक लाख से अधिक किसान परिवारों को योजना से लाभ मिलता, साथ ही सिंचाई के पानी की समस्या का निदान होने से आर्थिक समृद्धि में भी इजाफा होता। लेकिन यह योजना तमाम वायदों के बाद भी धरातल पर न उतर सकी। यह योजना यदि साकार होती है तो जालौन की 14731 हेक्टयर, कानपुर देहात की 39718 हेक्टयर और औरैया जिले की 10501 हेक्टेयर असंचित भूमि को पचनद बैराज का लाभ मिलेगा।
क्या थी योजना और अब तक क्या हुआ
48 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इटावा की जनसभा में किसानों के लिए पचनद बाध बनाने की घोषणा की थी। लेकिन उनकी सरकार ने घोषणा के बाद उस पर ध्यान नहीं दिया। प्रदेश में भाजपा सरकार आने पर लोगों को उम्मीद जगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बहुप्रतीक्षित बांध परियोजना को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल किया। 1 जनवरी 2021 को प्रदेश के प्रमुख सचिव एवं सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता ने पचनद बैराज की 2597 करोड़ रुपये की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखी थी। 3 साल पहले 2 जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल से बताया गया था कि पचनद बैराज परियोजना से जालौन, कानपुर देहात व औरैया की उपेक्षित पड़े क्षेत्र को सूखे से मुक्ति देने के लिए योजना जल्द ही मूर्तिरूप ले लेगी। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही यह योजना साकार हो सकेगी लेकिन अभी तक इस प्रोजेक्ट पर कोई काम होता नही दिखा है।
पचनद बांध प्रोजेक्ट में अब तक क्या हुआ
-जनवरी 2021 में मुख्यमंत्री के ट्वीट व इंडेक्स मैप आने से उम्मीदें जगी थीं। इंडेक्स मैप में बैराज से भोगनीपुर शाखा को जोड़ने वाली बाईं पंप कैनाल 13 किलोमीटर व जालौन के कुठौंद शाखा को जोड़ने वाली दायीं पंप कैनाल 12 किलोमीटर लंबी दिखाई गई थी। बैराज के साथ 19 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड नहर जिसकी चौड़ाई 20 से 25 मीटर बताई गई थी।निरीक्षण के बाद डीपीआर भी बन गया था। डीपीआर में परियोजना की लागत 2700 करोड़ रुपए आंकी गई थी। 2021 में 102 करोड़ 74 लाख 16 हजार रुपए का बजट भी आया था बैराज बनने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो पाई है सिर्फ सर्वे ही चल रहे हैं। इस तरह से काम होने से सालों तक बैराज बनने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
बांध से हैं क्षेत्रीय लोगों को हैं बहुत उम्मीदें
भिटौरा के किसान रतन सिंह कहते हैं कि पचनद बांध परियोजना से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे सिंचाई रोजगार और परिवहन को विस्तार मिलेगा लेकिन 48 साल से यह सिर्फ सपना बनकर रह गया है। जगम्मनपुर निवासी किसान नितिन द्विवेदी कहते हैं कि सिंचाई का साधन न होने से छोटे और सीमांत किसानों की माली हालत खराब है। चुनाव के वक्त बांध बनने की सुगबुगाहट होती है, पर हालात बदल नहीं रहे हैं। कुठौंद निवासी किसान विनय निषाद बोले कि अभी गेहूं और तिल्ली की फसल लग पा रही है। बांध बना तो सिंचाई के साधन बढ़ जाएंगे। इस योजना का बहुत दिनों से इंतजार कर रहे है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए ।
वर्जन-
यह प्रोजेक्ट पूर्व में भेजा जा चुका है। बांध की परियोजनाएं केंद्र सरकार के पास स्वीकृत होने के लिए जाती है। पचनद बांध के लिए फाइल केंद्र को भेजी गई है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर अग्रिम कार्रवाई की जा सकेगी। -राजेश कुमार पांडेय, जिलाधिकारी जालौन
48 साल बाद भी फाइलों में कैद पचनद बांध
कुठौंद/उरई। प्राकृतिक संपदा का यदि ठीक ढंग से उपयोग हो तो बुंदेलखंड की प्यास आसानी से बुझाई जा सकती है। पांच नदियों की अविरलता इलाके को प्राकृतिक ताैर पर समृद्ध तो बनाती है लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पता। पचनद पर बांध बनाने का प्रस्ताव 48 साल बाद भी सिर्फ कागजों में कैद है।
वैसे जालौन, औरैया और कानपुर देहात की हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने की लिए प्रस्तावित पचनद बांध परियोजना किसानों को लिए किसी वरदान से कम नहीं है। एक समय यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी, और पहूज के संगम पचनद पर बैराज की स्वीकृति मिलने से सीमावर्ती इलाके के किसानों और ग्रामीणों में खुशी थी। करीब 2600 करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना से जालौन, इटावा, औरैया, कानपुर देहात की हजारों हेक्टेयर असिंचित भूमि को नहरें निकाल कर सिंचित करने की योजना थी। एक लाख से अधिक किसान परिवारों को लाभ होता। सिंचाई की समस्या का निदान होने से आर्थिक समृद्धि भी आती। लेकिन, यह योजना सिर्फ कागजों में ही रह गई।
