अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। बुंदेलखंड की सूखी जमीन की प्यास बुझाने के लिए भले ही केन बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) उपयोगी साबित हो लेकिन तमाम सारी अड़चनों के चलते परियोजना की रफ्तार बेहद सुस्त है। परियोजना के लिए बजट आवंटित होने के बाद भी कई परियोजनाओं में अभी शुरुआती काम भी आरंभ नहीं हो सका है।

कई परियोजनाएं जमीन पर सर्वे कार्य पूरा न होने से अटकी पड़ी हैं। जिस रफ्तार से यह परियोजनाएं चल रही हैं, इसके मुताबिक काम पूरा होने में 10 साल से अधिक समय लगने की आशंका है। इसके बाद ही झांसी, ललितपुर के खेतों तक पानी पहुंच सकेगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना शुरू से ही लेटलतीफी का शिकार रही। दो नदियों को आपस में जोड़ने की कवायद वाजपेई सरकार के कार्यकाल में आरंभ हुई लेकिन यूपी एवं एमपी में सहमति न बनने से करीब 17 साल तक योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार के दखल पर दोनों राज्य परियोजना आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। करीब 44605 करोड़ की इस परियोजना से यूपी के झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा के कुल 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई समेत पेयजल मिलेगा।

परियोजना में 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र व 10 प्रतिशत राज्य को वहन करना है। परियोजना की शुरुआत पन्ना के दौधन बांध से होनी है लेकिन टाइगर रिजर्व के विस्थापन से लेकर अन्य विवाद के चलते यहां काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। इसका असर दूसरी परियोजनाओं पर पड़ रहा है। केन और बेतवा को आपस में जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी केन-बेतवा लिंक चैनल बनाया जाना है। इसका कई जगह सर्वे भी पूरा नहीं हुआ। हालांकि सिंचाई अफसरों का दवा है कि परियोजना पूरी करने की डेडलाइन मार्च 2030 तय की गई है। उस समय तक यह काम पूरा हो जाएगा। मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला का भी कहना है कि शुरुआत में कुछ समय लगा लेकिन, पूरा काम डेडलाइन तक पूरा हो जाएगा।

पारीछा बांध एवं बरुआसागर झील का होगा कायाकल्प

केबीपीएल के जरिये पारीछा बांध को भी जोड़ा जाएगा। इसके तहत इसमें अंग्रेजों के जमाने के गेट बदलने के साथ ही अन्य कार्य भी कराए जाएंगे। इसी तरह बरुआसागर झील का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। यह दोनों संरचनाएं सौ साल से अधिक पुरानी हैं।

किस जिले को कितना मिलेगा पेयजल

जनपद -घरेलू जल आपूर्ति (मिलियन क्यूबिक मीटर)

झांसी-14.66

ललितपुर-31.98

महोबा-20.13

परियोजनाओं पर इतना होगा खर्च

बांदा में केन नहर प्रणाली का सुधार-1191.51 करोड़

महोबा के 15 बांध एवं तालाब का जीर्णोद्धार एवं लिंक नहर- 510 करोड़

बांदा और पैलानी में दो बैराज- 2000 करोड़

बरियारपुर पिकअप वियर, पारीक्षा बांध एवं बरुआसागर झील का जीर्णोद्धार- 220 करोड़

महोबा और झांसी में लघु सिंचाई प्रणाली विकसित करना-1200 करोड़

इनसेट

दोनों राज्यों में पानी बंटवारे का फार्मूला नान मानसून (नवंबर से अप्रैल)

उत्तर प्रदेश- 750 मिलियन क्यूबिक मीटर

मध्य प्रदेश- 1834 मिलियन क्यूबिक मीटर

इनसेट

यह होगा फायदा

– सालाना 10.62 लाख हेक्टेयर जमीन की हो सकेगी सिंचाई

– 72 मेगा वाट क्षमता के दो विद्युत इकाई

– 102 मेगावाट हाइड्रो पावर और 28 मेगावाट की क्षमता का सोलर पावर प्लांट

– 1.50 लाख लोगों को पीने का पानी



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