
ड्रोन दीदी सरिता और रेखा
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उन्नत कृषि की ओर कदम बढ़ाते आगरा की दो महिला किसान खेती में ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। दोनों ने ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग ली है। वह अपने खेत के साथ-साथ ग्रामीणों को भी इसका लाभ दे रही हैं।
खंदौली ब्लॉक के गढ़ी राठौर की रेखा राठौर और छोटी बसई फतेहाबाद की सरिता शर्मा ड्रोन की प्रशिक्षित पायलट हैं। उन्हें हैदराबाद में ड्रोन को उड़ाने से लेकर उसके रख-रखाव की पूरी ट्रेनिंग प्राप्त की है।
सरिता ने बताया कि वह गांव के स्वयं सहायता समूह से तो पहले से ही जुड़ी थीं। जब ड्रोन दीदी परियोजना का पता चला तो उन्होंने भी इसके लिए आवेदन किया। बाहर से अधिकारी आए थे, उन्होंने इंटरव्यू लिया। सलेक्शन हो गया तो फिर हमें प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद भेजा गया।
रेखा के साथ ही प्रशिक्षण लेने वाली सरिता शर्मा ने बताया कि वहां पूरे देश से महिलाएं आईं थीं। अपने यूपी की भी बहुत सारी महिलाएं थीं। प्रशिक्षण के बाद इन प्रशिक्षुओं का इम्तिहान भी लिया गया। पास होने पर ही उन्हें ड्रोन का पात्र माना गया।
इसके बाद एक अन्य प्रशिक्षण प्रयागराज में भी दिया गया। मार्च माह में ही दोनों को ड्रोन भी उपलब्ध करा दिए गए थे। तब से वह खेती में ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं।
घंटों का काम होता है मिनटों में
सरिता ने बताया कि ड्रोन से क्षेत्र की नाप-जोख (मैपिंग) की जाती है। इसके बाद निर्धारित क्षेत्र के अनुसार दवा को टैंक में भर दिया जाता है। एक एकड़ खेत में दवा का छिड़काव करने में करीब 20 मिनट लगते हैं। पहले इसी काम को करने में पूरा दिन लग जाता था।
लागत हुई कम
रेखा ने बताया कि एक एकड़ खेत में दवा आदि छिड़काव के लिए करीब 400 रुपये की लेबर लगती है। ड्रोन से यह काम कम समय और कम लागत में हो जाता है। वह अपने आस-पास के किसानों को भी ड्रोन सेवाएं दे रही हैं।
एक समान होता है दवा का छिड़काव
ड्रोन से दवा और नैनो यूरिया छिड़काव करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे छिड़काव एक समान होता है। इससे लागत में भी कमी आई है। हाथ से छिड़काव करने पर कहीं अधिक तो कहीं कम दवा का छिड़काव होता है।
