
World Theatre Day 2026
– फोटो : अमर उजाला
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World Theatre Day 2026
– फोटो : अमर उजाला
रंगमंच शब्दों का नहीं, बल्कि उन खामोशियों का भी खेल है जो दो संवादों के बीच छूट जाती हैं। हिंदी के आधुनिक रंगमंच के पुरोधा मोहन राकेश की यह टिप्पणी भाषा और संवाद की उस गहराई तक ले जाती है, जहां एक रंगकर्मी बिना कुछ कहे भी सबकुछ बयां कर देता है। यह शहर सिर्फ ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और रंगमंच (थियेटर) परंपरा के लिए भी जाना जाता है। इसमें 400 साल से भी अधिक पुरानी लोक नाट्य विधा भगत का अहम स्थान है। हालांकि बदलते दौर में रंगमंच की यह विधा कई चुनौतियों का सामना कर रही है।