साल के अंत में कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी का मामला राष्ट्रीय स्तर पर छाया रहा। संसदी के शीतकालीन सत्र के साथ ही यूपी के विधानसभा के सत्र में राजनीतिक दल आमने-सामने आए। मुख्यमंत्री तक को जवाब देना पड़ा तो, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को वाराणसी में 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करनी पड़ी। फर्जी फर्म के जरिये बांग्लादेश, नेपाल तक कफ सिरप की तस्करी हुई। कमिश्नरेट की पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है।
बड़गांव थाने में तैनात दरोगा को 16 सितंबर को कचहरी में अधिवक्ताओं ने दौड़कर पीटा था। उनकी वर्दी फाड़ दी थी। दरोगा की पिटाई के बाद विवाद चर्चा के केंद्र में रहा। अधिवक्ता और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए। टकराव की नौबत आ गई। हफ्ते भर तक कचहरी में कामकाज ठप रहा। बाद में समझौता हुआ, फिर कामकाज शुरू हो सका।
लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती से अप्रैल 2025 में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र रही। काशी आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस आयुक्त से इस मामले में जानकारी ली थी और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। लापरवाही पर तत्कालीन थानाध्यक्ष विवेक पाठक को हटाया गया था।
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इसी तरह चौबेपुर के छितौना गांव में राजभर और ठाकुरों के बीच हुआ विवाद जातीय संघर्ष में तब्दील हो गया। राजनीति भी हुई। राजभर समुदाय से कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर सक्रिय हुए थे तो ठाकुरों के पक्ष से करणी सेना ने मोर्चा खोल दिया था। कैबिनेट मंत्री के विरोध में थाने पर ब्लॉक प्रमुख समेत क्षत्रिय नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले में एसआईटी गठित करनी पड़ी थी।
सिंधोरा के अधिवक्ता कैलाश के पुत्र हेमंत पटेल की ज्ञानदीप स्कूल में गोली मारकर हत्या से अधिवक्ताओं और पटेल नेताओं में काफी उबाल रहा। अपना दल (कमेरावादी) की विधायक पल्लवी पटेल ने वाराणसी में विरोध प्रदर्शन किया था। स्कूल प्रबंधक के बेटे राज विजयेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था। कमिश्नरेट पुलिस ने इस मामले में भी एसआईटी गठित की थी।
