daughters and son-in-law did not attend funeral After death of elderly woman in an old age home

समाजसेवियों ने किया वृद्धा का अंतिम संस्कार।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जिन बेटियों को मां ने अपनी जिंदगी का सहारा समझा जीवन के अंतिम पड़ाव पर वही मां अपनों से दूर वृद्धाश्रम में रह रही थी। निधन के बाद जब अंतिम संस्कार की बारी आई तो तीनों बेटियों, दामादों और धेवते-धेवतियों में से कोई आगे नहीं आया। परिजनों के इनकार के बाद संस्कार मानव सेवा समिति ने आगे बढ़कर महिला का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।


आवास विकास कॉलोनी निवासी शांतिदेवी (70) शुक्रवार को निधन हो गया। वह जून 2019 से कासगंज के वृद्धाश्रम में रह रही थीं। कुछ समय बाद वह एटा के वृद्धाश्रम में भी रहीं लेकिन 21 अक्तूबर 2024 को दोबारा कासगंज वृद्धाश्रम पहुंच गईं। बताया गया कि शांतिदेवी की तीन बेटियां, तीन दामाद और धेवते-धेवतियां हैं। उनका कासगंज स्थित आवास विकास कॉलोनी में एक मकान भी था, जिसे बेटियों और दामादों ने बेच दिया था। 

वह कूल्हा टूटने की समस्या से भी पीड़ित थीं। बीमारी और निधन की सूचना वृद्धाश्रम प्रबंधन ने मोबाइल फोन से उनके दामाद को दी लेकिन उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया। वृद्धाश्रम से कह दिया कि वे जो उचित समझें कर लें। इसके बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने संस्कार मानव सेवा समिति को सूचना दी। समिति के पदाधिकारी अमित चौहान व अन्य सदस्यों ने जिम्मेदारी निभाते हुए शांति देवी का अंतिम संस्कार एटा के माल गोदाम रोड स्थित मोक्षधाम में पूर्ण हिंदू रीति-रिवाज से कराया। अपनों की बेरुखी के बीच समिति ने मानवीय संवेदना का परिचय दिया।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें