मुरादाबाद जिले में विकास की तस्वीर बदलने के लिए चल रहीं आधा दर्जन से अधिक केंद्रीय योजनाएं कागजों में तो जिंदा हैं, लेकिन बजट और लक्ष्य बिना इन योजनाओं का जमीन पर दम निकलने लगा है। आधा वित्तीय वर्ष गुजरने को है, पर अभी तक आधा दर्जन योजनाओं का न तो लक्ष्य निर्धारित हो सका है और न ही बजट जारी किया है।
ऐसे में ये योजनाएं अघोषित रूप से बंद पड़ी हैं। गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की गई थी। इसके तहत चयनित गांवों में सड़क, नाली, पेयजल समेत अन्य सुविधाओं के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन जिले को 2026-27 के लिए कोई लक्ष्य नहीं मिला है।
करीब तीन साल से बजट भी जारी नहीं किया गया। इस योजना के तहत वर्ष 2020-21 में 44 गांव चयनित किए गए थे। इसके बाद नए गांवों का चयन नहीं हुआ। रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत जिले को प्रशिक्षण का कोई लक्ष्य नहीं मिला। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कोई लक्ष्य नहीं मिला था। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का भी यही हाल है। जिले के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया।
इसके अलावा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आदर्श गांव योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का कमोबेश यही हाल है। डीएसओ दीपक वार्ष्णेय ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लिए अभी शासन से कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है।
