नकली हॉलमार्क वाले गहनों को असली बताकर बेचने के मामले में पकड़ी गई महिला ने खुद को गिरोह का सदस्य मानने से इन्कार किया है। उसका कहना है कि परिचित अक्षय गुप्ता ने 40 हजार रुपये की जरूरत बताकर गहने गिरवी रखने के लिए दिए थे। उनकी शुद्धता की जांच कराने वह बिरहाना रोड स्थित सोना-चांदी ज्वैलर्स पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में महिला की बात सही प्रतीत हुई है। वहीं, प्राथमिकी में गिरफ्तारी से संबंधित धारा नहीं होने के कारण महिला समेत चार लोगों को थाने से जमानत मिल गई। पुलिस ने बरामद चेन और दो अंगूठियों को जांच के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की लैब भेजा है। एसीपी अमित कुमार पांडेय ने बताया कि सभी आरोपियों को नोटिस देकर छोड़ा गया है। बीआईएस की रिपोर्ट में हॉलमार्किंग फर्जी पाए जाने पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने समेत संबंधित धाराएं बढ़ाकर कार्रवाई की जाएगी।

चकेरी के सफीपुर, लाल बंगला निवासी सुमन सिंह के मुताबिक, अक्षय गुप्ता पहले उसके पड़ोस में रहता था और उसका घर आना-जाना था। इसी विश्वास के चलते उसने गहने ले लिए। उन्हें गिरवी रखने से पहले वह उनकी शुद्धता जांचना चाहती थी। इसी उद्देश्य से वह ज्वैलरी शोरूम पहुंची थी।

छह साल से दुकान में काम कर रहा था राहुल

एसीपी कोतवाली अमित कुमार पांडेय ने बताया कि सुमन और अक्षय से पूछताछ के बाद पुलिस आयुष तक पहुंची। इसके बाद चौक बाजार के तिलक पार्क स्थित सराफा दुकान में काम करने वाले राहुल से पूछताछ की गई। राहुल ने बताया कि वह करीब छह साल से दुकान मालिक दीपक वर्मा के यहां काम कर रहा है। दीपक ने हॉलमार्किंग के लिए 40 लाख रुपये की मशीन खरीदी थी। मामला सामने आने के बाद से दीपक फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

जांच में 10 प्रतिशत मिली गहनों की शुद्धता

बिरहाना रोड स्थित सोना चांदी ज्वैलर्स के मैनेजर आशीष डालमिया ने शुक्रवार शाम पुलिस को सूचना दी थी कि सुमन एक चेन और दो अंगूठियां बेचने पहुंची थी। गहनों का कुल वजन 18.440 ग्राम था। शुद्धता जांचने पर उनकी गुणवत्ता करीब 10 प्रतिशत मिली, जबकि उन पर 18 कैरेट की हॉलमार्किंग थी। पूछताछ में सुमन ने गहने अक्षय गुप्ता से मिलने की बात कही। अक्षय ने बताया कि वह चौक में काम करने वाले अपने परिचित आयुष से गहने लेता था। इसके बाद शनिवार शाम पुलिस ने तिलक पार्क स्थित दुकान से हॉलमार्किंग मशीन जब्त की थी। बता दें कि शहर में बीआईएस से मान्यता प्राप्त आठ सेंटर हैं।



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