सात हजार से अधिक यात्रियों की रोजाना आवाजाही, 200 बसों का संचालन और सुविधाओं के नाम पर बदहाल इंतजाम। फाउंड्री नगर के सैटेलाइट बस अड्डे कहीं कूड़े के ढेर और धूल के गुबार यात्रियों का स्वागत करते दिखे तो कहीं बस का इंतजार करने वालों के लोग गंदगी और बदबू के साए में मजबूर बैठे दिखे। स्वच्छ पीने के पानी की सुविधा नदारद नजर आई। संचालन शुरू हुए चार महीने बीतने के बाद भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
स्थान: सैटेलाइट बस अड्डा
समय: 12.40 बजे
बुधवार दोपहर की तल्ख धूप बस अड्डे पर बसों का आवागमन बना हुआ था। गेट पर हाथों में डंडा थामे दो कर्मचारी बैठे नजर आए। बैरिकेडिंग के लिए दोनों छोर पर रस्सी बांध रखी थी। हमने जैसे ही बस अड्डे के अंदर प्रवेश किया तो उसी दौरान एक बस ने प्रवेश किया तो धूल के गुबार उड़ने लगे। गेट अंदर जाते हुए फर्श पर गंदगी पड़ी नजर आई। पेयजल के लिए दो नल की टोंटी लगी हुई थीं, लेकिन वहां भी गंदगी पड़ी नजर आई।
आगे टिनशेड में संगमरमर के पत्थर की बेंच दिखाई दीं, जिन पर यात्री, चालक, परिचालक बैठे नजर आए। सुधा नामक महिला परिचालक ने बताया कि न तो बॉशरूम की यहां व्यवस्था है। न ही हमारे बैठने आराम करने की कोई जगह है। मैं सुबह 7 बजे मेरठ से बस लेकर आई हूं। शाम 3 बजे जाना है। ऐसे ही बैठना पड़ता है। वहीं चालक वीरेश ने बताया कि आराम करने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है।
कुछ खुले शौचालय बने हैं, जहां गंदगी पड़ी नजर आई। इसके बाद महिला और पुरुष शौचालय में भी गंदगी पड़ी थी, दो से ताला लटका नजर आया। कुछ देर में दो सफाईकर्मी आ गए। पूछा पहली बार आए हैं, जवाब मिला हां आज ही ठेकेदार ने भेजा है। आज देख रहे हैं, कल से सफाई करेंगे। जहां यात्री बैठते हैं। वहीं बगल से कूड़े का ढेर लगा हुआ था। प्रभारी एआरएम पवन श्रीवास्तव ने बताया कि सफाई कराई जाएगी। अभी टेंडर हुआ है।
जेनर्म की 76 कबाड़ बसें भी वहीं खड़ी दिखीं। बताया गया कि बस अड्डा नया शुरू हुआ है। नए तरीके से इसको बनाया जाएगा। वही दूसरी ओर नाले की स्लैब टूटी पड़ी थी। क्षेत्रीय दुकानदार ने बताया कि एक दिन पहले एक महिला यात्री इसमें गिर गई थी। गनीमत रही उसको तत्काल बाहर निकाल लिया गया। महिला यात्रियों के लिए कोई सुरक्षा का इंतजाम नजर नहीं आया।
