त्योहार सीजन में खाद्य पदार्थों से लेकर कच्चे माल के दामों में आए उछाल से परेशान लोगों पर अब ईएमआई की दोहरी मार पड़ेगी। रेपो रेट में 0.25% का इजाफा होने से व्यापारी और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। कर्ज किस्त बढ़ेगी। हालांकि, एफडी पर अधिक ब्याज भी मिलेगा।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और भू-राजनीतिक तनाव के चलते प्लास्टिक, लोहा, स्टील और सीमेंट जैसी औद्योगिक सामग्रियां महंगी हो चुकी हैं। दाल, मसाले और रसोई गैस जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं के दामों में भी उछाल है। दूसरी ओर, आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई बढ़ोतरी से होम और ऑटो लोन की किस्तें महंगी हो गई हैं। फेडरेशन ऑफ उद्योग व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरेश अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल और परिवहन लागत में भारी उछाल से उत्पादन लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। ग्राहक बाजार में हैं लेकिन खरीदारी को लेकर हिचक रहे हैं।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधमंडल के कोषाध्यक्ष सुरेश लवानिया ने कहा कि रेपो रेट बढ़ने से कंज्यूमर लोन महंगे हो गए हैं। त्योहारों पर जो लोग इलेक्ट्रॉनिक्स और गाड़ियां फाइनेंस कराते थे, वे अब अपने फैसले टाल सकते हैं। किराना कारोबारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि दाल-मसाले और रसोई गैस महंगी होने से मध्यम वर्ग का घरेलू बजट बिगड़ चुका है। आगरा लोहा व्यापार एसोसिएशन अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल का कहना है कि स्टील और सीमेंट के दाम बढ़ने से बिल्डरों की लागत बढ़ रही है। ऊपर से बैंक ब्याज दरें ऊंची होने के कारण नए होम लोन लेने वालों का रुझान सुस्त हुआ है।

 



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