Jansath क्षेत्र में इस समय धान और गन्ने की कटाई जोरों पर है। कटाई के बाद खेतों में बचे हुए कृषि अवशेष यानी पराली और सूखी पत्तियों को जलाने की प्रथा आज भी कई किसानों में प्रचलित है। लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी है कि पराली जलाना अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

एसडीएम राहुल देव भट्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि जो भी किसान खेतों में पराली या पत्तियों को जलाते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कार्य नहीं है, बल्कि यह कानूनी अपराध भी है जिसके लिए सरकार ने भारी जुर्माने के प्रावधान किए हैं।


🌿वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनी पराली – कोर्ट ने भी जताई चिंता

पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने को लेकर उच्चतम न्यायालय ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। हर साल अक्टूबर-नवंबर के दौरान जब पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान खेतों में पराली जलाते हैं, तो दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत का बड़ा इलाका जहरीली धुंध में डूब जाता है। अदालत ने इसे वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण माना है और इस पर रोक लगाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

एसडीएम ने बताया कि ऐसे में जानसठ क्षेत्र के सभी किसानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रशासन के आदेशों का पालन करें और अपने खेतों में पराली या पत्तियां न जलाएं।


🌾कृषि विभाग से मुफ्त में मिलेगी सहायता – अपनाएं वैज्ञानिक तरीका

एसडीएम राहुल देव भट्ट ने किसानों से अपील की है कि वे कृषि अवशेषों के निस्तारण के लिए कृषि विभाग से “वेस्ट डी-कम्पोजर” प्राप्त करें। यह एक जैविक समाधान है जो पराली को जलाने के बजाय उसे सड़ाकर जैविक खाद में बदल देता है। इससे न केवल खेत की उर्वरता बढ़ती है बल्कि मिट्टी की ऊपरी परत भी सुरक्षित रहती है।

उन्होंने बताया कि किसान कृषि बीज भंडारण केंद्र या कृषि बीज भण्डार दुकान से यह वेस्ट डी-कम्पोजर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इस तकनीक का उपयोग न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि किसानों की लागत को भी कम करता है क्योंकि इससे उन्हें तैयार जैविक खाद मिलती है, जिससे अगली फसल में रासायनिक खाद की जरूरत घट जाती है।


🚨अब होगी आर्थिक सजा – दोबारा गलती की तो सरकारी योजनाओं से भी वंचित रहेंगे किसान

एसडीएम ने बताया कि अगर कोई किसान इन निर्देशों का पालन नहीं करता और खेत में पराली जलाता है तो उसे निम्नलिखित अर्थदंड (जुर्माना) भरना होगा:

  • दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर ₹2,500 का जुर्माना।

  • दो से पांच एकड़ क्षेत्र में ₹5,000 का जुर्माना।

  • पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹15,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

यदि कोई किसान इस अपराध की पुनरावृत्ति करता है, तो उसे जुर्माने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं से वंचित भी कर दिया जाएगा। यानी भविष्य में कोई भी सरकारी सब्सिडी, बीमा या योजना का लाभ उसे नहीं मिलेगा।


🌍पर्यावरण बचाने में किसानों की अहम भूमिका – “अपनी धरती, अपनी जिम्मेदारी” अभियान की शुरुआत

प्रशासन ने बताया कि आने वाले हफ्तों में जानसठ तहसील में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा जिसका नाम होगा “अपनी धरती, अपनी जिम्मेदारी”। इसके तहत किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाएगा, साथ ही उन्हें यह भी बताया जाएगा कि वेस्ट डी-कम्पोजर का उपयोग कैसे किया जाए।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पराली जलाने से मिट्टी की जैविक शक्ति खत्म हो जाती है और खेत बंजर बनने लगते हैं। साथ ही, वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें फैलती हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं।


💨दिल्ली-NCR की हवा हर साल होती है जहरीली – पराली जलाने से बढ़ता संकट

हर साल अक्टूबर के महीने में दिल्ली-एनसीआर की हवा का गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ऊपर चला जाता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण होता है — खेतों में पराली जलाना। वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर भारत के कुल वायु प्रदूषण में लगभग 40% योगदान पराली जलाने का है।

इससे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में सांस की बीमारियों में तेज़ी से इजाफा हो रहा है। ऐसे में प्रशासन का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।


🔥एसडीएम का सख्त संदेश – “खेतों में आग लगाना नहीं, विकास की लौ जलाना सीखें”

एसडीएम राहुल देव भट्ट ने कहा कि किसान अगर पराली जलाना बंद कर दें तो न केवल उनका खेत उपजाऊ रहेगा बल्कि वे देश के पर्यावरण बचाने में भी अपनी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ है, लेकिन कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने सभी ग्राम प्रधानों, लेखपालों और कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को समझाएं और जो किसान नियमों का उल्लंघन करें, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करें।


🌱कृषक सहयोग से ही बनेगा हरित उत्तर प्रदेश – प्रशासन का आह्वान

प्रशासन ने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में किसानों को वेस्ट डी-कम्पोजर का उपयोग सिखाने के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें विशेषज्ञ किसान भाइयों को समझाएंगे कि कैसे कुछ सरल कदम उठाकर वे खेतों को उपजाऊ, पर्यावरण को स्वच्छ और भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं।


अंतिम अपडेट: जानसठ प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान दें। खेत में पराली जलाने से बचें, वेस्ट डी-कम्पोजर अपनाएं और “स्वच्छ हवा – स्वच्छ भारत” मिशन का हिस्सा बनें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।

 



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