कई लोग उम्र कम दिखाने के लिए आधार में जन्मतिथि बदलवाते हैं। इसमें अलग-अलग जन्म प्रमाणपत्रों को इस्तेमाल किया जाता है। मतलब पहला वाला प्रमाणपत्र निरस्त करवा दूसरा बनवा लिया जाता है। उसके आधार पर आसानी से जन्मतिथि बदलवा ली जाती है लेकिन अब ये हेरफेर नहीं हो सकेगा। इसके लिए नियम को बदलकर सख्त कर दिया गया है।

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दरअसल जो जन्म प्रमाणपत्र बनते हैं उनमें विशेष जन्म पंजीकरण संख्या दर्ज होती है। अब जो भी आधार कार्डधारक जन्मतिथि बदलवाना चाहेगा तो उसको पहले वाले जन्म प्रमाणपत्र में ही सुधार करवाना होगा। मतलब प्रमाणपत्र की जन्म पंजीकरण संख्या पहले वाली ही होनी चाहिए। अगर कोई आवेदक नई जन्मतिथि का नया प्रमाणपत्र बनवाकर लगाएगा तो ये स्वीकार नहीं किया जाएगा। यानी पहले जन्मतिथि दर्ज थी, वही रहेगी।



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