समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने लोगों को प्रदर्शनकारियों के बीच भेजकर युवाओं को गलत साबित करती है। लेकिन जब उन्हें ‘भाजपाई’ कहा जाता है तो वे चिढ़ जाते हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के घरों, दुकानों व गाड़ियों से अब भाजपा के झंडे उतर गए हैं। वे भाजपा की अयोध्या में चढ़ावा-चंदा-दान चोरी जैसे कृत्यों से शर्मिंदा हैं। दिल्ली में बच्चियों पर प्रहार, मुंबई में आंदोलनकारियों को ड्रग्स के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी शर्मिंदगी का कारण है। लखनऊ अग्निकांड में मृतक बच्चे की मां के साथ मुख्यमंत्री का दुर्व्यवहार भी एक काली करतूत है। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के सशुल्क और निशुल्क समर्थक अब किसी काम नहीं आ रहे हैं। वे जनाक्रोश देखकर ही घर से बाहर निकल रहे हैं, वह भी मजबूरी में। उनके व्हाट्सएप समूह भी ठंडे पड़े हैं। कट्टर समर्थक भी भाजपा की कारस्तानियों से समझ गए हैं कि वे खुद गलत थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछले 10-12 वर्षों में लोकतंत्र खत्म किया है। सरकारी विभागों का भ्रष्टाचारीकरण किया, कमीशनखोरी से महंगाई बढ़ाई और शिक्षा-परीक्षा में धांधली की। खरबपतियों के लिए श्रमिक पैदा किए, बलात्कारियों को बचाया और अमेरिकी कांड में मंत्री को नहीं हटाया। उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश की बेटियों के बलात्कारियों को बचाया गया।
लखीमपुर खीरी के थारकांड में किसानों को मारने वाले के सबूत भी झुठलाए गए। अखिलेश यादव ने भाजपा पर पीडीए पर अत्याचार करने और आरक्षण मारने की साजिशें रचने का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान मिटाने की हर संभव कोशिश की। विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाकर झूठे मुकदमे किए तथा बुलडोजर और मुठभेड़ का अमानवीय दुरुपयोग हुआ। शंकराचार्य पर भी निकृष्टतम आरोप लगाए गए, जिससे भाजपा का असली चेहरा समर्थकों के सामने आ गया है। इसीलिए भाजपा समर्थकों के लिए यह तथाकथित अमृतकाल अब अपमान के जहर भरे घूंट पीने का ‘विषकाल’ बन गया है।
