इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को 9149 नई अदालतों के गठन पर 13 अप्रैल तक अंतिम निर्णय लेकर बताने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के तहत विधि विभाग के प्रमुख सचिव बीते सोमवार को खंडपीठ के समक्ष पेश हुए और इस मामले में हुई प्रगति की जानकारी दी। अगली सुनवाई अब 13 अप्रैल को होगी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई एक जनहित याचिका पर दिया।

याचिका में प्रदेश में 9149 अदालतों के गठन का मुद्दा उठाया गया है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय कमेटी ने अक्तूबर 2024 में पहले चरण में 900 अदालतों के गठन की बात सैद्धांतिक रूप से स्वीकार की थी। इनमें 225 एचजेएस स्तर के, 375 सिविल जज सीनियर डिवीजन और 300 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालतें हैं। पर बात आगे न बढ़ पाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी।

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कोर्ट में पेश हुए प्रमुख सचिव, विधि उदय प्रताप सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले में सक्षम स्तर पर विचार किया गया है और प्रदेश में सैद्धांतिक रूप से करीब 900 अदालतों के गठन की मंजूरी संबंधी कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, सरकार, हाईकोर्ट प्रशासन से यह जानना चाहती थी कि ये अदालतें प्रदेश के किन जिलों में गठित होनी हैं।

कहा कि इस पर गत 28 फरवरी को हाईकोर्ट का पक्ष प्राप्त हो चुका है और अब मामले को सक्षम स्तर पर रखा जाएगा। इसमें करीब महीने भर का समय लगने की बात कही। इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को निर्धारित करके तब तक सरकार से मामले में अंतिम निर्णय लेकर अदालत को इसकी जानकारी देने की अपेक्षा की है।



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