ताजनगरी के जूता निर्यात उद्योग ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही अप्रैल-जुलाई में मजबूत बढ़त हासिल की है। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार आगरा के निर्यातकों का कुल निर्यात 8.07 प्रतिशत बढ़कर 1,613.53 करोड़ रुपये (16,135.31 मिलियन रुपये) पहुंच गया, जो बीते वर्ष की समान अवधि में 1,492.98 करोड़ रुपये था। इस तेजी का मुख्य आधार लेदर फुटवियर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग है।
आगरा से होने वाले कुल निर्यात में लेदर फुटवियर का एकतरफा दबदबा रहा। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान लेदर फुटवियर का निर्यात 8.46 प्रतिशत बढ़कर 1,605.95 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो 2025 में 1,480.71 करोड़ रुपये था। केवल जुलाई 2026 महीने की बात करें तो लेदर फुटवियर का निर्यात 4.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 518.43 करोड़ रुपये रहा।
कंपोनेंट्स और लेदर गुड्स निर्यात को झटका
जूतों का निर्यात बढ़ने के बावजूद फुटवियर कंपोनेंट्स और लेदर गुड्स सेगमेंट में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान कंपोनेंट्स का निर्यात 28.37 प्रतिशत घटकर 5.83 करोड़ रुपये (58.39 मिलियन रुपये) रह गया। वहीं लेदर गुड्स के निर्यात में 57.76 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई और यह सिमटकर 1.74 करोड़ रुपये रह गया।
निर्यात का रिपोर्ट कार्ड
(राशि: मिलियन रुपये में)
| उत्पाद श्रेणी | अप्रैल-जुलाई 2026 | अप्रैल-जुलाई 2025 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| लेदर फुटवियर | 16,059.51 | 14,807.06 | +8.46% |
| फुटवियर कंपोनेंट्स | 58.39 | 81.52 | -28.37% |
| नॉन-लेदर फुटवियर | 0.00 | 0.00 | 0.00% |
| लेदर गुड्स | 17.41 | 41.22 | -57.76% |
| कुल निर्यात | 16,135.31 | 14,929.80 | +8.07% |
देश के निर्यात में 28% हिस्सेदारी
चमड़े के जूतों के कुल निर्यात में आगरा की हिस्सेदारी लगभग 28 प्रतिशत है। यहां से सालाना 3,500 से 4,500 करोड़ रुपये का जूता निर्यात होता है। 170 से अधिक छोटे-बड़े निर्यातक कार्यरत हैं। इसके अलावा देश की 60 प्रतिशत घरेलू जूते की मांग को भी आगरा पूरा करता है। शहर में सालाना करीब 18 से 20 हजार करोड़ रुपये का घरेलू जूता कारोबार होता है जिस पर लगभग 3 लाख से अधिक लोगों की आजीविका निर्भर है।
युद्ध के माहौल में कारोबार बढ़ा पर मुनाफा घटा
वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के बावजूद जूता निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन निर्यातकों का मुनाफा लगातार घट रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण समुद्री भाड़ा (शिपिंग) महंगा होना और डॉलर के मुकाबले रुपये का उतार-चढ़ाव मुनाफे के मार्जिन को कम कर रहा है।
आठ प्रतिशत की वृद्धि उत्साहजनक
पूरन डावर, चेयरमैन फुटवियर और चमड़ा उद्योग विकास परिषद- जूता निर्यात में वृद्धि हुई है, लेकिन नॉन-लेदर सेगमेंट में शून्य प्रदर्शन चिंताजनक है। जब तक स्थानीय इकाइयां सिंथेटिक और स्पोर्ट्स शूज की दिशा में तकनीक अपग्रेड नहीं करेंगी तब तक हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में आ रहे बड़े बदलावों का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। —
कच्चे माल ने बिगाड़ा गणित
अंबा प्रसाद गर्ग, महासचिव आगरा सोल एंड शू कंपोनेंट एसोसिएशन- फुटवियर कंपोनेंट्स के निर्यात में 28 प्रतिशत की गिरावट ने एमएसएमई इकाइयों को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और विदेशी प्रतिस्पर्धा के कारण हमारे कंपोनेंट्स महंगे हो रहे हैं। सरकार को एमएसएमई सेक्टर के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।
शुद्ध मुनाफे में आ रही कमी
गोपाल गुप्ता, अध्यक्ष आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एक्सपोर्टर्स चैंबर- ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण शिपिंग भाड़ा और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति से कुल टर्नओवर बढ़ा हुआ दिख रहा है लेकिन निर्यातकों का शुद्ध मुनाफा मार्जिन 15 से 20 प्रतिशत तक घट गया है।
