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गोंडा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
– फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोंडा में विश्वविद्यालय की स्थापना की राह में सबसे बड़ी बाधा नकल के ठेके चलाने वाले लोग थे। उन्हें डर था कि विश्वविद्यालय बनने से उनका कारोबार बंद हो जाएगा। इसी वजह से वे यहां विश्वविद्यालय नहीं चाहते थे। सरकार ने विश्वविद्यालय देकर नकल के इस धंधे पर रोक लगाने और युवाओं का भविष्य संवारने का रास्ता खोला है। अब यहां नकल नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का काम होगा।
सोमवार को छपिया के तेजपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय बनने से गोंडा समेत देवीपाटन मंडल के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें अपने क्षेत्र में ही बेहतर शैक्षिक अवसर मिलेंगे और वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडा में महाराजा देवी बख्श सिंह के नाम पर मेडिकल कॉलेज बन चुका है। बहराइच में महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज संचालित है, जबकि बलरामपुर में अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने गोंडा-बलरामपुर और गोंडा-अयोध्या मार्ग के चौड़ीकरण का भी उल्लेख किया। कहा कि केंद्र सरकार से इसकी स्वीकृति मिल चुकी है और केंद्रीय मंत्री व सांसद कीर्तिवर्धन सिंह इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
गोंडा की पुरानी छवि बदलने का दावा
योगी ने वर्ष 2016 के स्वच्छता सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि उस समय गोंडा देश के सबसे गंदे शहरों में शामिल था। उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में गोंडा, बलरामपुर और बहराइच में अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौतों का जिक्र करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि उस दौर में गरीबों के बच्चों की जान की परवाह नहीं की गई और जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गरीबों को राशन, रसोई गैस और आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा है। दीपावली से पहले गरीब परिवारों को एक मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर देने की भी बात कही। उन्होंने खाद्यान्न घोटाले का उल्लेख करते हुए पिछली सरकारों पर गरीबों के हक पर डाका डालने का आरोप लगाया।

