‘रामहि देखि बरात जुड़ानी, प्रीति कि रीति न जाति बखानी…’ गोस्वामी तुलसीदास की पावन चौपाइयों का हर एक शब्द मंगलवार को उस वक्त ताजनगरी के हृदयस्थल में साकार हो उठा, जब रावतपाड़ा स्थित लाला चन्नोमल की प्राचीन बारहदरी से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की भव्य वरयात्रा जनकपुरी के लिए रवाना हुई। शंखनाद, डमरुओं की गूंज और लोगों के कंठों से गूंजते जयद्घोष के बीच पुराना शहर त्रेतायुगीन अवधपुरी के अलौकिक उत्सव में डूब गया। दरेसी, रावतपाड़ा, जौहरी बाजार और किनारी बाजार की संकरी गलियों से गुजरती इस ऐतिहासिक बरात का स्वागत शहर ने पलक-पांवड़े बिछाकर किया। यात्रा में शामिल 168 वाहनों और दिव्य रथों ने सनातन संस्कृति और पौराणिक आख्यानों के विविध प्रसंगों को सजीव कर दिया।
भगवान गणेश की आठ फीट ऊंची विशाल सवारी के पूजन-अर्चन के साथ बरात आगे बढ़ी। इसके बाद जब श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के अलौकिक स्वरूपों के दिव्य रथ निकले तो मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं का अगाध सैलाब उमड़ पड़ा। छतों से गुलाब और गेंदे की वर्षा से समूचा मार्ग कालीन की तरह फूलों से बिछ गया।
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राम बरात 2026
– फोटो : अमर उजाला
शहर दूधिया और सतरंगी एलईडी रोशनी की चादर में लिपटा नजर आया। प्रमुख चौराहों को भव्य तोरणद्वारों से सजाया गया है, जबकि मशहूर ब्रास बैंडों द्वारा बजाई जा रही ब्याहन को चले रघुराई… और अवध में बाजे बधाई… जैसी धुनों ने फिजाओं में रस घोल दिया।
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जगह-जगह लगे झूलों की रौनक ने बच्चों व युवाओं में उत्साह भर दिया। सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने जगह-जगह स्टॉल लगाकर बरातियों का स्वागत किया। सुरक्षा के चाक-चौबंद घेरे के बीच आस्था और आनंद का यह प्रवाह देर रात तक अपनी मंजिल जनकपुरी की ओर बढ़ता रहा।
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आरती-पूजन के साथ हुआ शुभारंभ
भगवान गणेश की विशाल सवारी के समक्ष विधायक चौधरी बाबूलाल और श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष व विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर हरी झंडी दिखाई। इस पावन अवसर पर कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल, मुख्य संरक्षक जगदीश बागला, मुख्य मार्गदर्शक डॉ. विजय किशोर बंसल, संजय तिवारी, मुकेश जौहरी और टीएन अग्रवाल सहित तमाम पदाधिकारी व्यवस्थाओं की बागडोर संभालते हुए बरात के साथ चले।
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जगह-जगह स्वागत
चौराहों और बरात मार्ग पर लगे गगनचुंबी आसमानी झूले, नाव और ड्रेगन राइड्स मेले में आए परिवारों और बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं। वहीं, सामाजिक व व्यापारिक संगठनों द्वारा जगह-जगह दूध-जलेबी, शीतल पेय, मिष्ठान और फलाहार के विशाल स्टॉल लगाकर बरातियों की खातिरदारी की गई।