जिस राजकीय महाविद्यालय में दाखिले के लिए कभी सिफारिश लगती थी, आज उसी परिसर की बेंचों पर विद्यार्थियों के इंतजार में धूल जम रही है। शनिवार को अलीगढ़ जनपद के राजकीय महाविद्यालय गोंडा में शिक्षक तो थे, लेकिन 94 पंजीकृत विद्यार्थियों में एक भी कक्षा में नजर नहीं आया। मैदान में उगी झाड़ियां, जर्जर सीढ़ियां और स्मार्ट क्लास की गिरी फॉल सीलिंग इसकी तस्वीर बयां कर रही थीं।
जिला मुख्यालय से 28 किमी दूर स्थित महाविद्यालय में शनिवार सुबह 11.30 बजे अमर उजाला की टीम पहुंची। यहां प्रवेशद्वार पर ही बदहाली नजर आई। पेड़ की शाखाओं ने महाविद्यालय का नाम ढक रखा था। इसी रास्ते से रोज शिक्षक गुजरते हैं, लेकिन शाखाओं की छंटाई तक नहीं कराई गई। प्रशासनिक भवन की दीवारों पर पौधे उग आए थे। किसी कमरे में एक भी विद्यार्थी नहीं था। एक कक्षा का दरवाजा खोला गया तो बेंच धूल से ढकी मिलीं। देखकर लगा रहा था कि इन पर लंबे समय से कोई बैठा ही नहीं है।
कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में 35, द्वितीय वर्ष में 33, तृतीय वर्ष में 21 विद्यार्थी पंजीकृत है। एमए अंग्रेजी में पांच और हिंदी में 11 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। एमए हिंदी और अंग्रेजी में 60-60 सीटें हैं, जबकि बीए में 420 सीटें हैं, लेकिन सभी कक्षाएं सूनीं थीं। जगह-जगह जर्जर सीढ़ियां और बाहर निकलती लोहे की पट्टियां नजर आईं। स्मार्ट क्लास की फॉल सीलिंग भी गिर चुकी है।
सीटों के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या कम है। संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों के पांच पद रिक्त हैं। मैदान के चारों तरफ दीवार के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। – डॉ. लोकेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय गोंडा
