राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गठित की गई एसआईटी की जांच अंतिम चरण में है। तीन दिन बाद एसआईटी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। एसआईटी ने जमीन की खरीद-फरोख्त और निर्माण संबंधी शिकायतों को अपनी जांच में शामिल नहीं किया है। सिर्फ चढ़ावा चोरी और ट्रस्ट के फेल हुए निगरानी तंत्र जैसे पहलुओं पर ही जांच की गई है। विस्तृत जांच में पारदर्शिता लाने के मद्देनजर कई अहम सिफारिशें भी एसआईटी करेगी।

चोरी का मामला उजागर होने के बाद ट्रस्ट की मांग पर 13 जून को शासन ने एसआईटी गठित की थी, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल थे। प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को सौंपी गई थी। 




Ram Mandir Donation Scam SIT probe does not include investigation complaints regarding land and construction

राम मंदिर
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


रिपोर्ट पूरी तरह से चढ़ावा चोरी व मंदिर प्रशासन की नाकामी पर केंद्रित थी। विस्तृत रिपोर्ट 15 जुलाई को सौंपी जानी है। इस दौरान ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों को लेकर तमाम शिकायतें की गई थीं। वहीं, कुछ शिकायतें निर्माण कार्य में कमीशन लेने के आरोपों से संबंधित थीं।

 


Ram Mandir Donation Scam SIT probe does not include investigation complaints regarding land and construction

राम मंदिर
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने इन शिकायतों को अपनी जांच में शामिल नहीं किया है। एसआईटी को शासन से जो निर्देश दिए गए थे, वे सिर्फ चढ़ावा चोरी की जांच तक सीमित थे। इसलिए एसआईटी सिर्फ चोरी के मामले की ही तफ्तीश कर रही है। 

 


Ram Mandir Donation Scam SIT probe does not include investigation complaints regarding land and construction

Ram Mandir
– फोटो : अमर उजाला


विस्तृत जांच इसलिए की जा रही है, जिससे घटना के पीछे की वजहें स्पष्ट हों, ताकि उनमें सुधार किया जा सके। इसलिए एसआईटी कई अहम सिफारिशें भी करेगी। सूत्र बताते हैं कि शासन से मिले निर्देशों से इतर जांच नहीं होगी। 

 


Ram Mandir Donation Scam SIT probe does not include investigation complaints regarding land and construction

राममंदिर का परिसर
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


इसलिए जमीन, निर्माण आदि की शिकायतों पर जांच का दायरा नहीं बढ़ाया गया है। जमीन मामलों की जांच न करने की एक वजह यह भी है कि शासन ने तीन साल पहले राधेश्याम मिश्रा कमेटी गठित की थी, जिसे जमीन संबंधी आरोपों की जांच करनी थी। उसकी जांच अब तक जारी है।




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