आगरा के राजामंडी बाजार में स्थित लाभचंद्र मार्केट के मामले में नगर निगम और जिला प्रशासन के अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिस मार्केट का पट्टा एक साल पहले निरस्त हो चुका था और उसे 30 दिनों में खाली होना था, वहां अफसर 10 महीने से शांत बैठे हैं। बुलडोजर बाहर नहीं निकला। नतीजा यह हुआ कि पट्टाधारकों पर प्रतिदिन तीन लाख रुपये के हिसाब से हर्जाना 11 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। निगम अब तक न तो कब्जा ले पाया है और न ही एक रुपये की वसूली हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने पर प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद, मंडलायुक्त मागेंद्र प्रताप, तत्कालीन डीएम अरविंद बंगारी, और तत्कालीन नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल समेत आठ बड़े अधिकारी अवमानना में फंस गए। फिर भी अवैध कब्जे पर बुलडोजर नहीं चला। इस मामले की अगली सुनवाई अब 22 मई को होगी, जिसमें अटॉर्नी जनरल खुद बिल्डिंग के ध्वस्तीकरण और विस्थापितों के पुनर्वास की योजना पेश करेंगे।

 



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