राजस्थान के भरतपुर से आई दो महिलाओं को 50 हजार रुपये के लोन पर 48 हजार रुपये चुकाने के बाद भी 37 हजार रुपये बकाया का नोटिस मिला। न्याय की उम्मीद में वे 70 किलोमीटर का सफर तय कर आगरा की दीवानी राष्ट्रीय लोक अदालत पहुंचीं। बैंक कर्मचारियों से कोई राहत नहीं मिलने पर वे मायूस होकर लौट गईं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। शारदा और ज्योति ने बताया कि उन्होंने 2019 में पैसाले डिजिटल लिमिटेड से 50 हजार रुपये का लोन लिया था। उन्होंने लगातार किस्तें भरी और करीब 48 हजार रुपये चुका दिए थे। कोविड महामारी के दौरान बैंक का कार्यालय बंद हो गया, जिससे अंतिम किस्त जमा करने में परेशानी हुई। उन्होंने उस व्यक्ति से संपर्क किया जिसने लोन कराया था, लेकिन उसने बताया कि वह अब वहां नौकरी नहीं करता।

इसके बाद उनका खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) हो गया। सात दिन पहले उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत का नोटिस मिला, जिसमें बैंक ने 37 हजार रुपये और बकाया बताए, जबकि उनकी केवल एक-दो किस्त बाकी थी। न्याय की आस में वे भरतपुर से आगरा आईं लेकिन बैंक ने कोई छूट नहीं दी। भीड़ में काफी देर तक इंतजार करने के बाद उन्हें काउंटर मिला था। उन्होंने बैंक कर्मचारियों से बकाया राशि कम करने की गुहार लगाई लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। दोपहर एक बजे तक कोई समाधान न मिलने पर वे निराश होकर वापस लौट गईं।



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