यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘आंकड़ेबाजी के लिए रतजगा’ की कहानी। इसके अलावा ‘काला कुत्ता उजला करेगा समय’ और ‘कम भौकाल से माननीय का बीपी हाई’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
आंकड़ेबाजी के लिए रतजगा
खेती-बाड़ी वाला विभाग इन दिनों सांसत में है। देसी अंदाज में चलने वाला यह विभाग अब हाईटेक हो रहा है। हाईटेक होने की जल्दबाजी में एक अफसर चकरघिन्नी बने हैं। वह लक्ष्य पूरा करने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है। दो दिन पहले बैठक में काम पूरा नहीं करा पाने के कारण उन्हें मुखिया ने फटकार लगाई। फिर क्या था, वह फटकार की भरपाई करने में जुट गए हैं। अब उनका एक ही ध्येय है कि डिजिटलीकरण हो या न हो लेकिन कागजों में आंकड़े पूरे दिखने चाहिए। इस कवायद में वह कार्यालय में ही रतजगा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि उनका प्रयास कारगर होता है या नहीं।
काला कुत्ता उजला करेगा समय
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग में इस समय एक बड़ी कुर्सी को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है। हालत यह है कि एक साहब को किसी पंडित ने सुझाव दिया कि समय अनुकूल करने के लिए आप काला कुत्ता रखिए और उसकी सेवा करिए। फिर क्या था, साहब के निर्देश पर मातहत काले कुत्ते का बच्चा लेकर आए। उसे हरियाली भरे कार्यालय के बाहरी हिस्से में रखा जा रहा है। एक दिन यहां पहुंचे एक अधिकारी ने पूछा कि यह क्या मामला है तो वहां के कर्मचारी ने जवाब दिया, काला कुत्ता साहब का समय उजला करेगा। अब यह बात विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है।
कम भौकाल से माननीय का बीपी हाई
मंत्रिमंडल में काबिज एक माननीय की ठसक अपने क्षेत्र में अच्छी खासी है लेकिन बाहर आते ही भौकाल को मानो ग्रहण लग जाता है। उनके क्षेत्र के ही एक साथी का रुतबा जितना अपने क्षेत्र में है, उससे थोड़ा बहुत कम ही राजधानी और प्रदेश के अन्य जिलों में होगा। बस यही बात उन्हें खाए जा रही है। अपनी टीम के सामने इस दर्द को वह जाहिर भी कर चुके हैं। बड़े-बड़े कार्यक्रमों का न्योता तो उनके पास आता है और वह जाते भी हैं लेकिन सुर्खियां कोई दूसरा बटोर ले जाता है। अब अपनी छवि का नए सिरे से रंग रोगन करने की तैयारी है।
