यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘भगवान के दर्शन संभव हैं, साहब के…’ की कहानी। इसके अलावा ‘पान मसाला के डिब्बे पर मिल रही छुट्टी’ और ‘कमाल की जोड़ी’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

भगवान के दर्शन संभव हैं, साहब के…

प्रदेश में सड़क, नाली,खड़ंजा से लेकर बड़ी बड़ी योजनाओं का खाका खींचने वाले अति महत्वपूर्ण महकमे पर काबिज साहब के दर्शन दुर्लभ हैं। सुबह से रात तक भीषण मीटिंग का ऐसा दौर चलता है कि साहब को पानी तक पीने की फुर्सत नहीं मिलती…ऐसा उनके मातहतों का कहना है। सूबे के किसी आम नागरिक को कोई काम हो तो उनके मातहतों का एक जवाब मिलता है- सर मीटिंग में हैं। कब आ जाएं? जवाब मिलता है- पता नहीं। थक हारकर ‘आम’ आदमी यही कह रहा है कि भगवान के दर्शन की तो आस है लेकिन साहब की नहीं।

पान मसाला के डिब्बे पर मिल रही छुट्टी

प्रदेश के एक प्रमुख राजकीय तकनीकी संस्थान के हाल बड़े अजीब हैं। यहां आए दिन किसी न किसी मुद्दे पर एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें खिचीं रहती हैं। कभी शिक्षक तो कभी अधिकारी आमने-सामने होते हैं। अब कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यहां के छोटे साहब बिना पान मसाला का डिब्बा लिए किसी भी कर्मचारी, यहां तक की गार्डों की भी छुट्टी मंजूर नहीं करते हैं। इससे वे काफी परेशान हैं और मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुका है। अब देखना है कि इस पर रोक लग पाती है या नहीं।

कमाल की जोड़ी

प्रदेश की एक बड़ी खेल एसोसिएशन में पति-पत्नी की जोड़ी का जलवा लंबे समय से चर्चा में है। बताया जाता है कि दोनों अदल-बदलकर एसोसिएशन के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं। बात अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की हो तो जोड़ी फिर साथ नजर आती है… हाल में पति कोच तो पत्नी सहायक कोच बनकर टीम के साथ गईं। एसोसिएशन से कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी सपोर्ट स्टाफ के रूप में जा चुके हैं। चर्चा है कि ऐसे में वास्तव में पात्र लोगों के लिए मौके सीमित हो जाते हैं। खेल का मैदान हो या विदेश दौरा, जोड़ी ऐसी कि जिम्मेदारी भी साझा और मौका भी साझा… बाकियों की बारी बस इंतजार में!



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें