family members took patient to hospital in a handcart in Hamirpur

ठेले पर मरीज को अस्पताल ले जा रहे परिजन
– फोटो : अमर उजाला



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हमीरपुर जिले में एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। शहर के बंगाली मोहाल में 10 बार 108 नंबर डायल करने करने के बाद भी नहीं मिली तो मजबूरी में तीमारदार अपने मरीज को ठेला में लिटाकर ई-रिक्शा में बांधकर जिला अस्पताल ले आया। शहर के अंदर एक किलोमीटर दूरी तय करने में मरीज व तीमारदार दोनों परेशान रहे। जिले में 108 की कुल 18 व 102 की 16 एंबुलेंस संचालित हैं। वहीं, एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) की चार एंबुलेंस जिले में उपलब्ध हैं। फिर भी मरीजों को इनकी सुचारु रूप से सुविधा नहीं मिल पाती है। 

तीमारदार अखिलेश शर्मा ने बताया कि उसके भाई सौरभ (25) का पिछले जून माह में लखनऊ के पीजीआई ट्रामा सेंटर में गुल्ले का आपरेशन हुआ था, जो ज्यादा चल फिर नहीं पा रहा था। बताया कि पिछले तीन नवंबर को वह घर में फिर से गिर गया, जिससे दोबारा गुल्ला में फ्रैक्चर हो गया। चार नवंबर को अस्पताल लाने के लिए सुबह करीब आठ बजे उसने करीब 10 बार 108 एंबुलेंस को फोन मिलाया, लेकिन फोन बीप की आवाज के साथ बार-बार बंद हो जाता रहा।

अखिलेश शर्मा ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे उसने फिर कई बार एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके चलते उसने भाई को ठेला में लेटाकर ई-रिक्शा में रस्सी के सहारे ठेला को बांधकर मरीज को जिला अस्पताल लेकर आया है। एक किलोमीटर के रास्ते में बस्ती से निकलने में उसे परेशानी हुई। वहीं, इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों से मरीज को लखनऊ ट्रामा सेंटर के लिए रेफर करने व एंबुलेंस मुहैया कराए जाने की गुहार लगाई, लेकिन अभी तक एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में ही भर्ती कर रखा है।

एंबुलेंस प्रभारी कपिल कुमार ने बताया कि मरीज की मां ने एक या दो बार फोन मिलाया है, लेकिन उनकी कॉल कनेक्ट नहीं हो सकी। जबकि उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। बताया कि हो सकता है कि तीमारदार के फोन में ही कोई समस्या रही हो या गलत नंबर डायल कर दिया गया हो। जबकि अन्य फोन बराबर कनेक्ट हो रहे हैं।

दो महीने पहले एक मरीज की हो गई थी मौत

स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के कड़े निर्देशों के बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते आए दिन मरीज परेशान रहते हैं। अभी दो माह पूर्व एक ऐसा ही मामला जिला अस्पताल में देखने को मिला था, जहां कानपुर के लिए रेफर मरीज को एंबुलेंस कर्मी व होमगार्ड नहीं ले गए और उसकी तड़प-तड़पकर मौत हो गई। मामले की जांच एडीएम को सौंपी गई। जिसमें एंबुलेंस कर्मी व होमगार्ड को दोषी पाया गया था।



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