हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में खतरनाक चाइनीज मांझे से लोगों की मौत होने व घायल होने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के गृह और कर विभाग के अपर मुख्य सचिवों/प्रमुख सचिवों, पुलिस महानिदेशक, औद्योगिक विकास और पर्यावरण विभागों के प्रमुखों को 13 जुलाई को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इन अफसरों से पूछा है कि पहले के आदेश के तहत खतरनाक मांझे के उत्पादन, बिक्री, इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने को क्या कदम उठाए हैं और क्या कार्यप्रणाली तय की है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की वर्ष 2018 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि खतरनाक चीनी मांझे के उत्पादन व बिक्री को रोकने के लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाएं। साथ ही, इस अपराध के अपराधियों को जवाबदेह बनाया जाए।
कोर्ट ने कहा था कि पिछले माह दिए गए आदेश के बाद राज्य सरकार ने कुछ जवाबी हलफनामे दाखिल किए हैं। हालांकि, अखबारों की खबरों से पता चलता है कि मांझे के इस्तेमाल से लोग चोट खा रहे हैं, जो जानलेवा भी हो रही हैं। अदालत ने मौजूदा आदेश में कहा कि खतरनाक मांझे पर रोक के लिए नियमित कार्रवाई किया जाना जरूरी है।
इसके मद्देनजर कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई पर इसकी रोकथाम के लिए प्रस्तावित नियम कानूनों का ब्योरा भी पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि चूंकि, यह मुद्दा जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा है, इसलिए कोर्ट इसके सभी पहलुओं पर गौर कर रहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को नियत की है।
